Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Breakng
    • 19 व 20 जुलाई को विद्युत आपूर्ति बाधित
    • सिरमौर में होगा मेगा जिला स्तरीय ‘‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’’ कार्यक्रम का आयोजन, 24 जुलाई तक करना होगा पंजीकरण।
    • सिरमौर में मुख्यमंत्री सहारा योजना के 270 लाभार्थियों को अप्रैल से जून तिमाही की सहायता राशि जारी
    • राज्यपाल ने जेयूआईटी के 7वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए
    • 21 व 22 जुलाई को सिरमौर जिला के लिए रेड अलर्ट जारी
    • स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से सुसज्जित करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता – डॉ. शांडिल
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Himachal Varta
    • होम पेज
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सिरमौर
      • ऊना
      • चंबा
      • लाहौल स्पीति
      • बिलासपुर
      • मंडी
      • सोलन
      • कुल्लू
      • हमीरपुर
      • किन्नोर
      • कांगड़ा
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • चण्डीगढ़
    • क्राइम
    • दुर्घटनाएं
    • पंजाब
    • आस्था
    • देश
    • हरियाणा
    • राजनैतिक
    Saturday, July 18
    Himachal Varta
    Home»हिमाचल प्रदेश»सरकार प्रदेश में संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री
    हिमाचल प्रदेश

    सरकार प्रदेश में संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री

    By adminawAugust 12, 2019
    Facebook WhatsApp

    शिमला। प्रदेश सरकार राज्य में संस्कृत भाषा को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि संस्कृत भाषा को पुनः उचित स्थान प्राप्त हो सके। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां संस्कृत भाषा को राज्य की दूसरी भाषा घोषित करने के लिए सप्ताह भर चलने वाले संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य पर आयोजित संस्कृत अभिनन्दन समारोह में दी। इस समारोह का आयोजन हिमाचल राज्य संस्कृत शिक्षा परिषद, हिमाचल संस्कृत अकादमी, हिमाचल संस्कृति एवं कला अकादमी व संस्कृत भारती हिमाचल प्रदेश के सौजन्य से किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत को प्राचीन भारत में ‘देवभाषा’ व देवताओं की भाषा के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य के कोष में कविता और नाटक के साथ-साथ वैज्ञानिक, तकनीकी, दार्शनिक और धार्मिक ग्रन्थों से भरपूर है। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों और बौद्ध धर्म के मंत्रों व भजनों में संस्कृत भाषा का व्यापक रूप से प्रयोग होता है।

    जय राम ठाकुर ने कहा कि संस्कृत भाषा भारतीय परंपरा और विचारों का महान प्रतीक है, जिसने सत्य की खोज के लिए पूर्ण स्वतंत्रता का प्रदर्शन किया और लौकिक सत्य की खोज के लिए एक नई दिशा दिखाई है। उन्होंने कहा कि इस अनूठी भाषा ने न केवल देश के लोगों को ज्ञान का पाठ पढ़ाया है बल्कि उचित ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक सामानांतर मार्गदर्शन भी किया जो समस्त विश्व के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे अधिक कम्प्यूटर अनुकूल भाषा है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी प्राथमिक स्कूलों में संस्कृत भाषा को पढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संस्कृत एकमात्र ऐसी भाषा है जिसे उसी तरह से लिखा जाता है जिस प्रकार इसका उच्चारण होता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा की खोई हुई पहचान को पुनः स्थापित करने व इसे आमजन में अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए हमें मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष के दौरान 50 विद्यालय व 50 महाविद्यालयों में संस्कृत प्रयोगशालाएं आरम्भ की जाएंगी।

    जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार शास्त्री अध्यापकों जिन्होंने बी.एड. की है को टी.जी.टी संस्कृत री-डेज़ीग्नेट करने की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

    शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि संस्कृत के मंत्रों का उच्चारण करोड़ों हिन्दुओं द्वारा किया जाता है तथा अधिकतर धार्मिक अनुष्ठानों में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत लाहौल-स्पीति के एक गांव में बोली जाने वाली मुख्य भाषा है। उन्होंने कहा कि यदि संस्कृत का और अधिक प्रचार किया जाए, तो यह दूसरे राज्यों के लोगों के मध्य एक कड़ी के रूप में काम कर सकती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को शास्त्र के भंडार के रूप में और हिंदू धर्म में प्रार्थना की भाषा के रूप में मान्यता दी गई है। हिमाचल प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य था जहां देवनागरी को विशेष रूप से प्रयोग में लाया गया।

    संस्कृत भारत ट्रस्ट के उत्तरी ज़ोन के कार्यकारी सचिव जय प्रकाश ने कहा कि संस्कृत किसी एकमात्र सम्प्रदाय की भाषा नहीं है, बल्कि एक ऐसी भाषा है जिसे विश्व की प्राचीन भाषा होने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने कहा कि देश में 17 संस्कृत विश्वविद्यालय हैं और शीघ्र ही हिमाचल प्रदेश में एक और विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा।

    इस अवसर पर संस्कृत भाषा के कई विद्वानों ने इस भाषा के इतिहास के महत्व पर प्रकाश डाला।

    हिमफेड के अध्यक्ष गणेश दत्त तथा उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा भी अन्य सहित इस अवसर पर उपस्थित थे।

    Follow on Google News Follow on Facebook
    Share. Facebook Twitter Email WhatsApp
    Recent
    • 19 व 20 जुलाई को विद्युत आपूर्ति बाधित
    • सिरमौर में होगा मेगा जिला स्तरीय ‘‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’’ कार्यक्रम का आयोजन, 24 जुलाई तक करना होगा पंजीकरण।
    • सिरमौर में मुख्यमंत्री सहारा योजना के 270 लाभार्थियों को अप्रैल से जून तिमाही की सहायता राशि जारी
    • राज्यपाल ने जेयूआईटी के 7वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए
    • 21 व 22 जुलाई को सिरमौर जिला के लिए रेड अलर्ट जारी
    Recent Comments
    • Sandeep Sharma on केन्द्र ने हिमालयी राज्यों को पुनः 90ः10 अनुपात में धन उपलब्ध करवाने की मांग को स्वीकार किया
    • Sajan Aggarwal on ददाहू मैं बिजली आपूर्ति में घोर अन्याय
    © 2026 Himachal Varta. Developed by DasKreative.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.