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    Home»हिमाचल प्रदेश»वैज्ञानिक सोच के लिए उपयुक्त वातावरण जरूरी: राज्यपाल
    हिमाचल प्रदेश

    वैज्ञानिक सोच के लिए उपयुक्त वातावरण जरूरी: राज्यपाल

    By Himachal VartaOctober 22, 2019
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    सरस्वती विद्या मंदिर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय ज्ञान-विज्ञान मेला संपन्न
    शिमला। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि जैसी संगति और संस्कार मिलते हैं बच्चे वैसे ही बनते हैं। हिमाचल शिक्षा समिति सम्पूर्ण हिमाचल में अनुशासित तथा संस्कार रूपी ज्ञान का प्रकाश फैला रही है।
    राज्यपाल आज शिमला के विकासनगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में हिमाचल शिक्षा समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय ज्ञान-विज्ञान मेले के समापन अवसर पर बोल रहे थे।
    उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के प्रचार-प्रसार में हिमाचल शिक्षा समिति प्रशंसनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विद्या भारती का कार्य हिमाचल शिक्षा समिति के रूप में वर्ष 1980 में पांवटा साहिब में एक सरस्वती विद्या मंदिर प्रारम्भ करने के साथ शुरू हुआ था और यह वर्तमान में 217 विद्यालयों का संचालन कर रही है, जिनमें 2136 आचार्यों के संरक्षण में 30 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश में ये विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों, जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी कार्यरत है और डोडरा क्वार जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी विद्यालय चलाए जा रहे हैं।
    राज्यपाल ने कहा कि आज विज्ञान का युग है और शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र है जहां वैज्ञानिक शोध के साथ नवीन तकनीक का सदुपयोग न हो रहा हो। इसलिए जरूरी है कि वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार किया जाए, जिससे भावी पीढ़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ वैज्ञानिक शोध का लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि यह समाज, प्रदेश और देश के विकास में भी नितांत आवश्यक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि हिमाचल शिक्षा समिति विद्यार्थियों में वैज्ञानिक प्रतिभा विकसित करने का अवसर प्रदान करने और उन्हें यह बोध कराने के लिए कि वे कल के वैज्ञानिक हैं, के दृष्टिगत ज्ञान-विज्ञान मेले का आयोजन प्रांत स्तर से लेकर अखिल भारतीय स्तर तक कर रही है।
    उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं संस्कृति दोनों का जीवन में समन्वय होना चाहिए। विज्ञान का इस्तेमाल उन्नति एवं प्रगति के लिए होना चाहिए, न कि विध्वंस के लिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से बच्चों का मानसिक विकास तो होता ही है साथ ही, हमारी भावी पीढ़ी वैज्ञानिक सोच के साथ देश के विकास में योगदान दे सकती है। उन्होंने कहा कि आज हमारे वैज्ञानिक नासा की ओर नहीं बल्कि इसरो और डीआरडीओ जैसे संस्थानों के माध्यम से अंतरिक्ष पर भारत का परचम लहरा रहे हैं। वह चाहे कृषि क्षेत्र हो या फिर सूचना प्रौद्योगिकी, अधोसंरचना विकास या फिर परिवहन क्षेत्र, दुनिया में हम विकसित राष्ट्रों के समक्ष खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का सही अर्थ विद्यार्थियों की कुशलता को बढ़ाना और उनमें अपनी संस्कृति और परम्पराओं के प्रति सम्मान पैदा करना है, ताकि शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात् वे रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि रोजगार प्रदान करने वाले बन सकें। इसके लिए उनमें कौशल विकास को बढ़ावा मिलना चाहिए।
    राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रतिभावान विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया।
    इस अवसर पर देशभक्ति पर आधारित कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।
    इससे पूर्व, राज्यपाल ने बच्चों द्वारा लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
    हिमाचल शिक्षा भारती के महासचिव दिला राम ने समिति की गतिविधियों की जानकारी दी।
    सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य लेखराज ठाकुर ने राज्यपाल का स्वागत किया और दो दिवसीय मेला सम्बन्धी जानकारी दी।
    इस अवसर पर पवन राणा, संगठन मंत्री, भाजपा, अच्छर सिंह ठाकुर जी, संरक्षक, हिमाचल शिक्षा समिति, देवी रूप शर्मा, अध्यक्ष हिमाचल शिक्षा समिति, गुलाब सिंह मेहता, उपाध्यक्ष तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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