Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Breakng
    • विकास कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन प्रदेश सरकार की प्राथमिकता – डॉ. शांडिल
    • जयराम ठाकुर ने पांवटा में जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को किया सम्मानित
    • एसडीवीएच पांवटा साहिब में विश्व रेबीज दिवस 2026 का आयोजन
    • रेणुका जी बांध परियोजना ददाहू के अन्तर्गत द्वितीय चरण में प्रभावित बेघर/गृहविहीन 31 संरचना अधिगृहीत परिवारों की सूची अधिसूचित: उपायुक्त
    • चूड़ेश्वर लीजेंड्स की महत्वपूर्ण बैठक में हिमाचल कबड्डी लीग को लेकर रणनीति और तैयारियों पर चर्चा
    • डीसी जतिन लाल ने की एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों की समीक्षा
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Himachal Varta
    • होम पेज
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सिरमौर
      • ऊना
      • चंबा
      • लाहौल स्पीति
      • बिलासपुर
      • मंडी
      • सोलन
      • कुल्लू
      • हमीरपुर
      • किन्नोर
      • कांगड़ा
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • चण्डीगढ़
    • क्राइम
    • दुर्घटनाएं
    • पंजाब
    • आस्था
    • देश
    • हरियाणा
    • राजनैतिक
    Monday, September 28
    Himachal Varta
    Home»हिमाचल प्रदेश»वन मंत्री ने राजबन व गोरखपुर स्थित आरक्षित वनों मे किये जा रहे वन संवर्धन के कार्यों का लिया जायजा
    हिमाचल प्रदेश

    वन मंत्री ने राजबन व गोरखपुर स्थित आरक्षित वनों मे किये जा रहे वन संवर्धन के कार्यों का लिया जायजा

    By Himachal VartaNovember 22, 2019
    Facebook WhatsApp

    नाहन। फरवरी 2018 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के बाद पांवटा साहिब में वानिकी सिद्धांतों के अनुरूप वृक्ष कटान का कार्य शुरु किया गया था। वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने वीरवार को वन अधिकारियों की टीम के साथ स्वयं जायजा लिया।
    उन्होंने कार्य प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और बताया कि इस कार्य का उद्देश्य पुराने व रोग-ग्रस्त वृक्षों को हटा वनों मे सूर्य की रोशनी का प्रवेश बढ़ाना था ताकि नये पौधे उगने के लिए अच्छा परिवेश तैयार हो सके। इस प्रक्रिया से न केवल नये पौधे जंगल मे पनपते हैं अपितु कटान से प्राप्त लकड़ी नीलामी के माध्यम से वन निगम द्वारा बेची जाती है और राजस्व की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त इस प्रक्रिया मे खरपतवार उन्मूलन, जंगल मे आग फैलने से रोकने वाली फायर-लाईन, वन-क्षेत्र को सुरक्षित करते बाउंडरी पिल्लर आदि का निर्माण भी किया जाता है। कटान के बाद वन क्षेत्र को तार-बाड़ के माध्यम से बंद कर नयी पौध की रक्षा की जाती है।
    उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वन प्रबंधन से न केवल स्वस्थ वन पनपते हैं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों मे भारी मात्रा मे रोजगार के अवसर भी मिलते हैं। वन मंत्री ने पांवटा मे किए जा रहे वानिकी कार्यों की बारीकियों को जाना। वन मंत्री ने आरक्षित वनों की राजस्व रिकार्ड मे एंट्री करवाने के लिए एस.डी.एम पांवटा से चर्चा भी की। गौरतलब है कि वानिकी के सिद्धांतों के अनुरूप होने वाले हरित-कटान पर 1996 मे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गयी थी। विभाग द्वारा वानिकी सिद्धांतों का ब्योरा देते हुए 2018 मे न्यायालय से प्रयोगात्मक कटान की अनुमति प्राप्त की ताकि न्यायालय को वानिकी के अनुरुप हुए कटान के लाभ से वाकिफ करवाया जा सके।
    इस मौके पर विधायक पांवटा सुखराम चौधरी, खाद्य आपूर्ति निगम उपाध्यक्ष बलदेव तोमर, वन अरण्यपाल बी.एस राणा, डी.एफ.ओ नाहन कुणाल अंग्रिश व पांवटा वन मंडल का स्टाफ उपस्थित रहा।

    Follow on Google News Follow on Facebook
    Share. Facebook Twitter Email WhatsApp
    Recent
    • विकास कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन प्रदेश सरकार की प्राथमिकता – डॉ. शांडिल
    • जयराम ठाकुर ने पांवटा में जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को किया सम्मानित
    • एसडीवीएच पांवटा साहिब में विश्व रेबीज दिवस 2026 का आयोजन
    • रेणुका जी बांध परियोजना ददाहू के अन्तर्गत द्वितीय चरण में प्रभावित बेघर/गृहविहीन 31 संरचना अधिगृहीत परिवारों की सूची अधिसूचित: उपायुक्त
    • चूड़ेश्वर लीजेंड्स की महत्वपूर्ण बैठक में हिमाचल कबड्डी लीग को लेकर रणनीति और तैयारियों पर चर्चा
    Recent Comments
    • Sandeep Sharma on केन्द्र ने हिमालयी राज्यों को पुनः 90ः10 अनुपात में धन उपलब्ध करवाने की मांग को स्वीकार किया
    • Sajan Aggarwal on ददाहू मैं बिजली आपूर्ति में घोर अन्याय
    © 2026 Himachal Varta. Developed by DasKreative.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.