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    Home»हिमाचल प्रदेश»नई शिक्षा नीति भविष्योन्मुखी: राज्यपाल
    हिमाचल प्रदेश

    नई शिक्षा नीति भविष्योन्मुखी: राज्यपाल

    By Himachal VartaNovember 24, 2019
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    राज्यपाल सम्मेलन के दौरान उप-समिति की बैठक
    नयी दिल्ली/शिमला। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि नई शिक्षा नीति, 2019 का प्रारूप सही दिशा मेें उठाया गया कदम है। यह न केवल सिर्फ वर्तमान समय की मांग की पूर्ति करता है बल्कि भारत की युवा जनसंख्या की अपेक्षाओं के अनुरूप भविष्योन्मुखी है।
    राज्यपाल आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन मेें राज्यपाल सम्मेलन के दौरान ‘नई शिक्षा नीति- उच्च शिक्षा’ के संदर्भ में आयोजित उप-समिति की बैठक में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अनुसंधान विकास, नवाचार एवं नई तकनीक का उपयोग इस नीति की विशेषताएं हैं। साथ ही, स्थानीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं एवं संस्कृति के संरक्षण की बात भी इसमें कही गई है।
    उन्होंने कहा कि भारत एक युवा राष्ट्र है, जिसकी 15 से 35 वर्ष की आयु वर्ग की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। यह जनसंख्या वर्ष 2036 तक लगभग 65 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। जबकि विदेशों में यह संख्या कम हो रही है। उन्होंने कहा कि डेमोग्राफिक डिविडेंड को पूरी तरह से तभी महसूस किया जाएगा, जब भारत अपनी जनसंख्या को सार्वभौमिक गुणवत्ता की शिक्षा देने में सक्षम होगा। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए कौशल प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में नये रोजगार के अवसर नये कौशल पर आधारित होंगे। इसलिए हमारी शिक्षा व्यवस्था भविष्य को देखते हुए तैयार की जानी चाहिए।
    श्री दत्तात्रेय ने कहा कि हिमाचल सरकार द्वारा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में राज्य अच्छा कार्य कर रहा है। प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में विशेषकर प्रारम्भिक शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण, नैतिक और मूल्यों पर आधारित शिक्षा का संतुलन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नई शिक्षा नीति के साथ बच्चों में समग्र विकास के साथ राष्ट्रीयता की नव चेतना का संचार होगा और वह राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे।

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