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    Home»हिमाचल प्रदेश»नागरिकता संशोधन अधिनियम देश की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री
    हिमाचल प्रदेश

    नागरिकता संशोधन अधिनियम देश की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री

    By Himachal VartaDecember 18, 2019
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    शिमला। नागरिकता संशोधन अधिनियम देश की एकता और अखण्डता को सुनिश्चित बनाए रखने के लिए पारित किया गया है और यह देश के अल्पसंख्यक नागरिकों के खिलाफ नहीं है। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज भाजपा जिला शिमला द्वारा आयोजित ‘बुद्धिजीवी सम्मेलन’ में सम्बोधित करते हुए कही।
    जय राम ठाकुर ने कहा कि यह अधिनियम देश के दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राष्ट्र की एकता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पहल है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद-370 को हटाने के बाद देश के मजबूत नेतृत्व की यह एक और मुख्य पहल है। उन्होंने कहा कि इससे भारत कश्मीर से कन्याकुमारी तक वास्तव में एक राष्ट्र और एक संविधान वाला राष्ट्र बना है। उन्होंने राम जन्मभूमि निर्णय के लिए माननीय उच्च न्यायालय का धन्यवाद किया, इससे अयोध्या में भव्य राम मन्दिर बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बिल को नाकाम करने में असफल रहने पर विपक्ष के नेता अब सार्वजनिक सम्पति को नुकसान पहुंचाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से देश के पड़ौसी तीन मुस्लिम बहुसंख्यक देशों पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता प्राप्त करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में इन तीन देशों से हिन्दु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को आयु के मापदण्ड में छूट प्रदान कर यह सीमा 11 से 06 वर्ष की गई है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश से 31 दिसम्बर, 2014 से पूर्व भारत आए हिन्दु, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन व पारसी लोगों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। यह अधिनियम तीन देशों से आए इन धर्माें के उन लोगों को भी नागरिकता प्रदान करने में मद्द करता है, जिनके पास अपेक्षित दस्तावेज नही हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष इस अधिनियम को लेकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है, जबकि यह दोनों ही सदनों में प्रभावी चर्चा के उपरान्त पारित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी व्यक्ति की पहचान धर्म से नहीं करता है जैसा कि अन्य पड़ौसी देशों में है। उन्होंने कहा कि आर्थिक, पर्यावरण, वैवाहिक, शिक्षा आदि कई कारणों से लोग विस्थापित होते हैं। बंगलादेश में हिन्दु 28 प्रतिशत घटकर 08 प्रतिशत रह गए हैं। ऐसी ही स्थिति पाकिस्तान में भी है।
    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव ने कहा कि त्रिपुरा, मिजोरम, असम, मेघालय के जनजातीय क्षेत्र संविधान की छठीं अनुसूची में शामिल हैं इसलिए यहां नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम उन क्षेत्रों में भी लागू नही होता है, जो बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर 1873 के तहत आंतरिक सीमा में अधिसूचित किए गए हैं, इस कारण अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड लगभग पूरी तरह इस अधिनियम की सीमा से बाहर हो गए हैं।
    मुरलीधर राव ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम देश की एकता और अखण्डता को मजबूत करने की ओर कदम है। उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्र की एकता और अखण्डता के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक मात्र दल है जो राष्ट्रहित के मुद्दों को लेकर निरंतर जनता के सम्पर्क में है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष के नेता इस मुद्दे को लेकर सामान्य जन-जीवन को प्रभावित कर रहे है तथा सार्वजनिक सम्पति को नुकसान पहुंचा रहे है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि कांग्रेस पार्टी गैर लोकतांत्रिक तरीकों का सहारा ले रही है।
    मुरलीधर राव ने कहा कि भाजपा किसी धर्म या क्षेत्र के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में रह रहे अल्पसंख्यकों को चिन्ता करने की आवश्यकता नही है, क्योंकि सरकार उनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में झूठा प्रोपेगंडा करके देश के लोगों को गुमराह कर रहा है।
    उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के बाद भी पाकिस्तान से मुस्लिम 11 वर्ष तक भारत में रहने के बाद सभी सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर भारत के नागरिक बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से तीन देशों के हिन्दु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को आयु मंे छूट प्रदान कर आयु सीमा 11 वर्ष से घटाकर 06 वर्ष की गई है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान उन तीन देशों के मुस्लिमों के लिए कैसे लागू हो सकता है, जहां वह बहुसंख्यक है। उन्होंने कहा कि 1950 में जवाहर लाल नेहरू और लियाकत अली के मध्य दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए इकरारनामा हुआ था। भारत ने इसका पूर्णतः पालन किया, जबकि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचला गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दक्ष और सशक्त नेतृत्व में यह अधिनियम पारित हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक राष्ट्र-एक संविधान के लिए प्रतिबद्ध है।
    भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सती ने मुख्यमंत्री तथा मुख्य बक्ता मुरलीधर राव का स्वागत करते हुए कहा कि इन दोनों ही नेताओं ने 90 के दशक में जम्मू-कश्मीर में पार्टी के लिए काम किया है, उस समय वहां आतंकवाद चरम था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में लोगों में जागरूक करने के लिए देश भर में विभिन्न स्तरों पर बुद्धिजीवी सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है।
    इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर, विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. राजीव बिंदल, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार, परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, मुख्य सचेतक नरेन्द्र बरागटा, सांसद शिमला सुरेश कश्यप, सांसद मण्डी राम स्वरूप शर्मा, विधायक बलबीर वर्मा, पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप, उपाध्यक्ष हिमुडा प्रवीण शर्मा, हिमफैड के अध्यक्ष गणेश दत्त, राज्य भाजपा महासचिव चंद्र मोहन, रणधीर शर्मा, महासचिव बाल कल्याण परिषद पायल वैद्य, शिमला जिला भाजपा अध्यक्ष रवि मेहता, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार त्रिलोक जमवाल, मुख्यमंत्री के ओएसडी महेंद्र धर्माणी, महापौर नगर निगम शिमला सत्या कौंडल, उप महापौर शैलेंद्र चैहान व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

     

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