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    Home»हिमाचल प्रदेश»राज्यपाल का विज्ञानियों से कृषि क्षेत्र में नई तकनीकें अपनाने का आह्वान
    हिमाचल प्रदेश

    राज्यपाल का विज्ञानियों से कृषि क्षेत्र में नई तकनीकें अपनाने का आह्वान

    By Himachal VartaMarch 5, 2020
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    शिमला। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने विज्ञानियों का आह्वान किया है कि वे अपना अनुसंधान सीधा किसानों तक पहंुचाएं और उन्हें लाभान्वित करने के लिए नई तकनीकों का प्रयोग करें। वह आज सोलन जिला के डाॅ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के 10वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे।
    उन्होंने इस अवसर पर 22 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और अन्य विद्यार्थियों को डिग्रियां भी वितरित की। दीक्षांत समारोह में कुल 1104 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।
    राज्यपाल ने कहा कि विज्ञानिक शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका इस्तेमाल किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए होना चाहिए। कृषि और बागवानी क्षेत्र हमारी आर्थिकी की रीढ़ हैं और इनके सुदृढ़ीकरण के लिए विज्ञानियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए उन्हें इन दोनों क्षेत्रों में सुधार के लिए समर्पण की भावना से कार्य करना चाहिए।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 49 प्रतिशत क्षेत्र में सेब की फसल का उत्पादन होता है और प्रदेश के कुल फल उत्पादन में सेब का 84 प्रतिशत योगदान है। सेब की तीन हजार करोड़ रुपये की आर्थिकी हैं और प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में इसका छः प्रतिशत योगदान है। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों का अवैज्ञानिक और अत्याधिक प्रयोग न केवल हमारी सेहत के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे उत्पादन की कीमत भी बढ़ रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि इस समस्या के समाधान के लिए कोई व्यावहारिक योजना तैयार की जाए।
    श्री दत्तात्रेय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती नामक योजना आरम्भ की है। नौणी विश्वविद्यालय में हुए शोध से यह सामने आया है कि प्राकृतिक खेती की पद्धति न केवल सब्जियों व फसलों बल्कि सेब जैसी फसलों के लिए भी कारगर सिद्ध हो रही है।
    केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की रैकिंग में देश के 60 कृषि विश्वविद्यालयों में 12वां स्थान प्राप्त करने तथा देश के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों की सूची में 80वां रैंक प्राप्त करने के लिए राज्यपाल ने नौणी विश्वविद्यालय प्रबन्धन को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय ने पिछले वर्ष लगभग दो हजार किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया और किसान मेला जैसे कार्यक्रम भी कार्यान्वित किए जा रहे हैं।
    राज्यपाल ने कहा कि आज युवाओं के सामने कौशल विकास और नई तकनीकों का ज्ञान अर्जित करते रहने की बड़ी चुनौती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि आगामी तीन दशकों में वर्तमान रोजगार में 50 प्रतिशत कटौती होगी और नए अवसरों के लिए नई दक्षता की आवश्यकता होगी। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि युवा अपने आपको इस स्थिति के लिए तैयार करेगे और विशेषकर युवा विज्ञानी दक्षता विकास की दिशा में और अधिक समर्पण से कार्य करेंगे।
    उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को युवाओं को कृषि, बागवानी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए और उन्हें तकनीकी सहायता देनी चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बागवानी विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2021 तक प्राकृतिक कृषि राज्य घोषित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
    बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन समूचे विश्व के सामने बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसका प्रभाव सीधे कृषि, बागवानी और खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। हालांकि नई तकनीकों में यह क्षमता है कि इनसे हमारे कार्य और जीने की परिस्थितियों में परिवर्तन लाया जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज क्या निर्णय लेते हैं।
    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि नौकरियों के पीछे भागने के बजाय वे उद्यमिता की ओर बढ़ें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक विद्यार्थी को कोई गांव अपनाना चाहिए ताकि अपने शोध का लाभ किसानों तक पहुंचा सके। उनकी वैज्ञानिक सोच से किसान बहुत लाभान्वित होंगे और वे अपनी आर्थिकी मजबूत बनाने में सक्षम बनेगे।
    राज्यपाल ने डिग्रियां हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी और आह्वान किया कि वे निस्वार्थ भाव से देश व प्रदेश की सेवा करें।
    नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. परमिंदर कौशल ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।
    डीन, वानिकी डाॅ. कुलवन्त राय शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
    कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डाॅ. अशोक सरयाल और नौणी विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष इस अवसर पर उपस्थित थे।

     

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