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    Home»आस्था»राम मंदिर के इतिहास में हिमाचल का भी जुड़ा नाम!
    आस्था

    राम मंदिर के इतिहास में हिमाचल का भी जुड़ा नाम!

    By Himachal VartaAugust 5, 2020
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    राम मंदिर के इतिहास में हिमाचल का भी जुड़ा नाम पूजन सामग्री में शामिल गूगल किन्नौर से

    कश्मीर का केसर, कर्नाटक का घी, 100 नदियों के जल के साथ आठ अर्जक करेंगे भूमि पूजन…

    नाहन। 492 वर्षों से चले संघर्ष करीब 36 बार हुए महा संघर्ष के बाद आखिर 130 करोड़ लोगों की आस्था का विजय पर्व आज न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया बना रही है और आज रचे जाने वाले इस इतिहास में हमारे देव भूमि हिमाचल प्रदेश का नाम भी जुड़ जाएगा। यह एक्सक्लूसिव जानकारी मंदिर के ट्रस्टी नृत्य गोपाल दास के काफी करीबी संत के माध्यम से जुटाई गई है। असल में बड़े-बड़े विद्वानों वेदाचार्य कर्मकांड के पारंगत पंडितों के द्वारा पूजन सामग्री में जिस स्थान की वस्तु का महत्व है उस स्थान से तमाम वस्तुओं को जुटाया गया है। जिसमें केसर कश्मीर से तथा शुद्ध देसी घी कर्नाटक से मंगाया गया है।

    तो वही हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला का गूगल पूजन व हवन सामग्री में इस्तेमाल किया जाना है आपको बता दें कि किन्नौर के बुलिंग व भावा के काफ्नू के जंगलों में दुनिया का सबसे बेहतर गूगल होता है। वेदों में हिमालया से जुटाई गई जड़ी बूटियों में गूगल का नाम भी शामिल होता है। यह वन संपदा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अंतर्गत आती है। जिसका वन विभाग टेंडर भी करवाता है। यहां का गूगल अमृतसर मंडी में जाता है जहां से यह देश और दुनिया में पूजन व सुगंध आदि में इस्तेमाल किया जाता है।

    वेदाचार्य केशवानंद रतूड़ी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह हिमाचल प्रदेश का गौरव है और गर्व भी है कि रामलला के निवास में होने वाले पूजन के लिए हिमाचल प्रदेश की भी भागीदारी सुनिश्चित हुई है। आपको यह भी जानकारी दे देते हैं कि ठीक 11:30 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या पहुंचेंगे। सबसे पहले नरेंद्र मोदी 11:40 पर हनुमानगढ़ी के हनुमान मंदिर में 10 मिनट का पूजन करेंगे। उसके बाद निर्माण स्थल पर ठीक 12:44-40 सेकंड से पहले पीएम नरेंद्र मोदी इतिहास की पहली ईट रखेंगे। यहां हम आपको एक और एक्सक्लूसिव जानकारी भी दे रहे हैं कि आजादी के बाद से लेकर अभी तक राम लला के दर्शन कोई भी देश का प्रधानमंत्री न्यायपालिका चल रहे विवादों के कारण नहीं कर पाए थे।

    लिहाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री होंगे जो खुद पहली बार आज रामलला के दर्शन भी कर सकेंगे। रामलला को बेला जिंदाबाद गुलाब के फूलों से सजाया गया है और आपको यह भी बता दें कि आज रामलला हरे वस्त्रों में सजे हुए हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साथ आज अशोक सिंघल का नाम भी इस मंदिर के निर्माण के साथ इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। आपको यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर 5 लोग ही मौजूद होंगे। जिसमें मोहन भागवत आर एस एस प्रमुख, राज्यपाल उत्तर प्रदेश आनंदीबेन पटेल, योगी आदित्यनाथ तथा मंदिर ट्रस्ट के संत नृत्य गोपाल दास भी शामिल होंगे। 100 पवित्र नदियों के जल के साथ 5 नक्षत्रों की प्रतीक चांदी की सीट रखी जाएगी।

    भूमि पूजन करने में आठ अर्जक शामिल हुए हैं पत्थर की शिला उसे पूजन होगा। शिला पूजन में नौ शीला रखी गई है। भूमि पूजन में पाताल लोक के राजा शेषनाग स्थापित होंगे उसके बाद पूर्वा यानी कछवा के ऊपर शीला रख मंदिर की बुनियाद रखी जाएगी। यह भी जानकारी दे दें कि चांदी की रजत जिला का भार एक मन का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आज मंदिर की प्रतिष्ठा है बाद में दे प्रतिष्ठा होगी। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सुरक्षा के तमाम इंतजाम आज अयोध्या में किए गए हैं। प्रवेश की तमाम सीमाएं सील कर दी गई हैं। पूरी अयोध्या पर ड्रोन से नजर रखी जा रही है। देश के सधे हुए स्नाइपर छतों पर हरबर्ट अलर्ट मोड पर है।

    तो आप आज समझ सकते हो कि दिन 16 सामग्रियों का गणेश पूजन के लिए इस्तेमाल किया गया है। उन सामग्रियों में तथा रामलला के निवास स्थान के लिए जो पूजन हो रहा है। उसमें हिमाचल का भी नाम आज के बाद जुड़ जाएगा। पूरी दुनिया के राम भगत इस समय बेहद प्रसन्न है। क्योंकि हम सब के आराध्य लंबे समय से टेंट में थे और अब अस्थाई मंदिर में है। जिसको लेकर हर किसी के मन पर हिंदू राष्ट्र होने के बावजूद यारियां चला करती थी। इसमें कोई शक नहीं है कि सरकार के प्रयासों से सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना हो गई है। राम धर्म नहीं मर्यादा के प्रतीक माने जाते हैं ज्ञानी समाज में नैतिकता और मर्यादा होनी बहुत जरूरी है और वास्तव में इसका श्रेय भाजपा की सरकार को सीधे-सीधे जाता है।

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