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    Home»हिमाचल प्रदेश»अतुल्य विकास व सम्पन्नता की ओर वीरभूमि हिमाचल
    हिमाचल प्रदेश

    अतुल्य विकास व सम्पन्नता की ओर वीरभूमि हिमाचल

    By Himachal VartaAugust 15, 2020
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    74वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2020) पर लेेख

    जय राम ठाकुर मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

    15 अगस्त, हम सब भारतवासियों के लिए एक गौरवमयी ऐतिहासिक दिन है। वर्ष 1947 में, इसी दिन हमारे देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। आज हम सब देशवासी मिलकर अपने महान लोकतांत्रिक देश का 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस शुभ अवसर पर मैं समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं तथा सबके सुखद भविष्य की कामना करता हूँ।
    स्वतंत्रता दिवस का यह पावन दिन, आज़ादी के उन महानायकों को स्मरण करने का भी है, जिन्होंने माँ भारती को गुलामी की जंजीरों से आज़ाद करने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। कुर्बानियां देकर हमें स्वतंत्रता दिलवाने वाले भारत माता के वीर सपूतों को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ तथा सभी वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानियों को शत-शत नमन करता हूँ। यह दिन प्रत्येक भारतीय के लिए विशेष महत्त्व रखता है, क्याेंकि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए इस कठोर तपस्यापूर्ण यात्रा ने हमें देश को विकास के शिखर की ओर ले जाने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है।
    स्वतंत्रता संग्राम में हिमाचलवासियों ने भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया। धामी गोलीकांड, प्रजामण्डल आन्दोलन, सुकेत सत्याग्रह तथा पझौता आन्दोलन जैसी घटनाएं इसका ठोस प्रमाण हैं। इस अवसर पर मैं प्रदेश के पुरोधाओं, स्वतंत्रता सेनानियों तथा राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाई. एस. परमार को शत्-शत् नमन करता हूं।
    वीरभूमि हिमाचलः प्रदेश का इतिहास पराक्रम, शौर्य और बलिदान से ओत-प्रोत रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से पूर्व और आजादी के बाद हुए विभिन्न युद्धों व संघर्षों में प्रदेश के नौजवानों ने सदैव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अदम्य साहस का परिचय दिया है। देश की खातिर कुर्बान होना यहां की गौरवमयी परम्परा है। यही कारण है कि यह प्रदेश देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी है। स्वतंत्रता के पहले भी प्रदेश के सैनिकाें को 1 जॉर्ज क्रॉस, 2 विक्टोरिया क्रॉस तथा दो मिलिट्री क्रॉस सहित कुल 23 सेना मैडल से नवाज़ा गया है।
    यह बड़े गर्व की बात है कि देश का प्रथम परमवीर चक्र अपने सर्वोच्च बलिदान के लिए प्रदेश के वीर सपूत मेजर सोमनाथ शर्मा को प्राप्त हुआ था। वर्ष 1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान भी हमारे वीर जवानों ने अपनी वीरता का परचम लहराया और कैप्टन विक्रम बतरा व हवलदार संजय कुमार को परमवीर चक्र प्राप्त हुए। कर्नल डी. एस. थापा को भी उल्लेखनीय शौर्य के लिए यह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ है। प्रदेश के वीर जवानों ने चार परमवीर चक्र व दो अशोक चक्र सहित 1096 वीरता पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
    हाल ही में, लद्दाख की गलवान घाटी में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहादत पाने वाले प्रदेश के वीर सैनिकों को भी मैं शत-शत नमन करता हूं। सीमाओं की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों का सम्पूर्ण राष्ट्र कृतज्ञ है। वीरों द्वारा रचित शौर्य-गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेंगी। हमारे सेवारत जवान सरहदों पर मुस्तैदी से जुटे हैं और हमारे पूर्व सैनिक प्रदेश के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
    प्रदेश सरकार वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानियों, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों, सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारजनों के कल्याण के प्रति वचनबद्ध है। प्रदेश सरकार द्वारा उनके कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। प्रदेश सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों तथा दिवंगत स्वतंत्रता सेनानियों की पत्नियों को 15 हजार रुपये व अविवाहित बेटियों को 10 हजार रुपये प्रति माह प्रदान किए जा रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों की बेटियों के विवाह के लिए 51 हजार रुपये तथा पोतियों के विवाह के लिए 21 हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को सरकारी व अर्धसरकारी सेवा में दो प्रतिशत आरक्षण की सुविधा भी प्रदान की गई है।
    हमारी सरकार ने परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं की वार्षिकी को तीन लाख रुपये, महावीर चक्र व कीर्ति चक्र विजेताओं को दो लाख रुपये, वीर चक्र तथा शौर्य चक्र विजेताओं की वार्षिकी को एक लाख रुपये किया है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान कीर्ति चक्र व शौर्य चक्र विजेताओं को लगभग 7.50 करोड़ रुपये के लाभ प्रदान किए हैं। युद्ध विधवाओं की बेटियों की शादी के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया गया है।
    मैं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके मज़बूत नेतृत्व में भारत एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरा है। सशक्त नेतृत्व ही एक सशक्त राष्ट्र की पहचान है। आज समूचा विश्व हमारे देश की ताकत व क्षमता का लोहा मान रहा है। सीमा पर पड़ोसी देशों को मुंह-तोड़ जवाब और कोविड-19 के दौरान आत्मनिर्भर भारत अभियान का आगाज इसके सार्थक प्रमाण हैं।
    न्यू इंडिया: आज हमारा देश आत्मनिर्भरता की ओर मज़बूती से बढ़ रहा है। न्यू इंडिया के निर्माण में मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति तथा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयास वरदान सिद्ध होंगे। केन्द्र सरकार द्वारा लागू नई शिक्षा नीति भारत को पुनः विश्व गुरू बनाने में सहायक होगी। सफलतापूर्वक चलाए जा रहे स्वच्छ भारत मिशन ने पूरे देश को स्वच्छ व सुन्दर बनाने में अहम् भूमिका निभाई है।
    समृद्धि की नींव: वर्ष 1948 में अस्तित्व में आने के बाद प्रदेश ने अपनी विकास यात्रा लगभग शून्य से आरम्भ की है। आरम्भिक दो दशकों तक यहां विकास की गति धीमी रही, परन्तु 25 जनवरी, 1971 को पूर्ण राज्य बन जाने के बाद प्रदेश के विकास में गति आई। यह छोटा-सा सुन्दर पहाड़ी प्रदेश आज एक प्रगतिशील राज्य के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इसका श्रेय प्रदेश की कर्मठ, ईमानदार व भोली-भाली जनता को जाता है। इसके लिए मैं समस्त हिमाचलवासियों को साधुवाद देता हूँ और सबका आभार व्यक्त करता हूँ।
    नए युग का उदयः 27 दिसम्बर, 2017 को हमारी सरकार को प्रदेश की जनता की सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ और प्रदेश में विकास के एक नए युग का सूत्रपात हुआ। इस कार्यकाल में प्रदेश सरकार ने विकास के अनेक आयाम स्थापित किए तथा नई बुलंदियां छुईं। इस कार्यकाल में प्रदेश के सभी क्षेत्रों के समग्र एवं संतुलित विकास व सभी वर्गाें के उत्थान को मूल मंत्र बनाकर प्रदेश सरकार ने अनेक सर्वहितैषी योजनाएं आरम्भ कीं।
    मंत्रिमण्डल की पहली बैठक में ही वृद्धजनों को सम्मान देते हुए सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने की आयु सीमा को 80 वर्ष से घटाकर 70 वर्ष किया गया तथा इसमें कोई आय सीमा नहीं रखी गई। इस समय प्रदेश में 70 वर्ष से अधिक आयु के 2.85 लाख से अधिक वृद्धजन 1500 रुपये की मासिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। विधवाओं व दिव्यांगजनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। वर्तमान कार्यकाल में विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 1,63,607 नए मामले स्वीकृत किए गए हैं।
    जनभागीदारी को प्राथमिकताः जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आरम्भ ‘जनमंच’ के तहत प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में 189 जनमंच आयोजित किए गए, जिनमें 45,000 शिकायतें व मांगें प्राप्त हुईं। इन शिकायतों में से 91 प्रतिशत का समाधान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन-1100 के तहत प्राप्त एक लाख से भी ज्यादा शिकायतों में से अधिकतर का निवारण किया जा चुका है। आमजन की शिकायतों के त्वरित समाधान तथा सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों के संबंध में जनता की राय जानने के उद्देश्य से My Gov पोर्टल आरम्भ किया गया है, जिससे सरकार को कल्याणकारी योजनाएं बेहतर ढंग से तैयार करने में सहायता मिलेगी।
    बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएंः प्रदेश में ‘हिमकेयर’ योजना के तहत अब तक 5.50 लाख परिवार पंजीकृत हो चुके हैं और एक लाख से ज्यादा लोग अपना उपचार करवा चुके हैं, जिस पर 91.43 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। सहारा योजना केे तहत गम्भीर बीमारियों से पीड़ित रोगियों को 2000 रुपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना के तहत अब तक 9078 लाभार्थियों को 5.90 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। इस राशि को अब बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया गया है।
    हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना के तहत 2.78 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध करवाए गए हैं। हिमाचल प्रदेश ऐसी उपलब्धि पाने वाला देश का प्रथम राज्य बन गया है। इस बार बजट में 10 हजार आवासों के निर्माण का लक्ष्य रखा है ताकि प्रदेश में सभी गरीबों को रहने के लिए घर उपलब्ध हों।
    मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना ने प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार अपनाने को प्रेरित किया है। योजना के तहत 25 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जबकि महिलाओं को 30 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। अब तक 946 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं, जिस पर सरकार ने 44 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की है। योजना के सफल कार्यान्वयन से प्रदेश के युवा रोज़गार तलाशने की बजाए अब रोज़गार प्रदाता बन रहे हैं।
    किसानों और बागवानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से अनेक नई कृषि योजनाएं आरम्भ की गई हैं। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने में मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना सफल सिद्ध हुई है। अब तक लगभग 2600 किसानों ने लाभ उठाया है, जिस पर 80.36 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। बागवानों के लिए आरम्भ एंटी हेलनेट योजना के तहत 1587 हेक्टेयर क्षेत्र लाया गया है, जिस पर 44.44 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। प्रदेश में हींग तथा केसर की खेती को बढ़ावा देने के लिए नई परियोजनाएं आरंभ की गई हैं। अब तक 59 हजार किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है।
    प्रदेश के लिए स्वीकृत 800 करोड़ रूपये की जायका परियोजना के तहत पौधरोपण और ग्रामीण आजीविका सुधार कार्यांे पर 41 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। राज्य में आरम्भ मुख्यमंत्री एक बीघा योजना केे तहत एक बीघा तक की भूमि में एक महिला या उसके परिवार को बैकयार्ड किचन गार्डन तैयार करने के लिए 40,000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘पंचवटी योजना’ का शुभांरभ किया गया है, जिसके तहत सभी विकास खंडों में पार्क और बागीचे विकसित किए जाएंगे।
    प्रदेश में केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित सभी योजनाओं को बड़े प्रभावशाली ढंग से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप इस प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त हो रहे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश को दी जा रही उदार वितीय सहायता तथा प्रायोजित की जा रही अनेक बड़ी परियोजनाओं के लिए मैं प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त करता हूँ।
    कोविड-19 महामारी की चुनौतीः इस वर्ष पूरी दुनिया एक नई चुनौती का सामना कर रही है। कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय पर उठाए गए प्रभावशाली कदमों के कारण देश के नागरिकों के जीवन की रक्षा हो सकी है। इस महामारी के कारण उत्पन्न विकट आर्थिक परिस्थितियों से निपटने के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा और जरूरतमंद लोगों को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करके प्रधानमंत्री जी ने एक संवेदनशील नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत किया है। इस संकट की घड़ी में केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज जारी किया है। इस पैकेज से किसानों, पशुपालकों, रेहड़ी-फड़ी वालांे, गरीबों, कामगारों, सूक्ष्म, लघु व मध्यम वर्गीय उद्यमियों, प्रवासी मज़दूरों आदि सभी को राहत पहुंची है।
    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत देश के गरीब परिवारों को नवम्बर, 2020 तक मुफ्त राशन की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत 5 लाख 90 हजार पात्र महिलाओं के खातों में प्रति महिला 500-500 रुपये हस्तांतरित किए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तीन सिलेंडर निःशुल्क प्रदान किए गए, जिससे प्रदेश में एक लाख 36 हजार गृहिणियां लाभान्वित हुईं। प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत सभी मेडिकल स्टाफ, सफाई कमर्चारियों व स्वास्थ्य कर्मियों को 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के 8 लाख 74 हजार किसानों के खातों में 2000-2000 रुपये प्रदान किए गए हैं।
    प्रदेश में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत एक लाख श्रमिकों को 2000-2000 रुपये की सहायता राशि प्रदान गई, जिस पर 40 करोड़ रुपये व्यय हुए। आशा कार्यकर्ताओं को मार्च से जून, 2020 तक चार माह के लिए 1000 रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। अब जुलाई और अगस्त में आशा कार्यकर्ताओं को 2,000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त दिए गए हैं।
    प्रदेश में कोरोना के मामलों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सहयोग से एक्टिव केस फांइडिंग अभियान चलाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले और इस अभियान की देशभर में प्रशंसा हुई। प्रदेश में कोविड-19 के मामलों में रिकवरी दर 63.81 प्रतिशत तथा मृत्यु दर मात्र 0.44 प्रतिशत है। इसी दौरान देश के साथ-साथ प्रदेश में भी ई-संजीवनी पोर्टल आरम्भ किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को घर बैठे चिकित्सा परामर्श प्रदान करना था। यह हर्ष की बात है कि हमारे ई-संजीवनी पोर्टल के इस प्रयास को देशभर में तीसरा स्थान मिला है।
    प्रदेश के 6 डैडिकेटिड कोविड अस्पतालों, 11 डैडिकेटिड कोविड हैल्थ सेंटर तथा 38 डैडिकेटिड कोविड केयर सेंटर में 2809 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। केन्द्र सरकार से स्वास्थ्य क्षेत्र में कोविड-19 के लिए 52 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई है। क्वारंटीन केन्द्रों के प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित किया गया है और इन पर लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कोविड-19 के सभी चिन्हित संस्थानों में मास्क, पीपीई किट, वेन्टीलेटर, ऑक्सिजन आपूर्ति के उपकरण जैसी आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करवाई गई हैं। सरकार ने मार्च, 2020 के बाद 8 RT-PCR जॉंच केन्द्र, 24 TRUNAAT जॉंच केन्द्र और दो CB-NAAT जॉंच केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
    इस दौरान राशन, फल सब्जी व दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं की होम डिलीवरी के लिए 1750 दुकानों को पंजीकृत किया गया, जिनके माध्यम से 16 लाख 76 हजार लोगों को आवश्यक वस्तुएं घर पहुंचाई गईं। प्रदेश में ‘एक देश-एक राशन कार्ड’ सुविधा आरम्भ की गई। कोरोना महामारी के दृष्टिगत 5.69 लाख पेंशनधारकों को सितम्बर, 2020 तक पेंशन का अग्रिम भुगतान कर दिया गया है, जिस पर 424.58 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं।
    प्रदेश में स्थापित कोविड-19 राज्य आपदा रिस्पोंस फंड में लोगों ने उदारता से योगदान दिया है। इसमें लगभग 82 करोड़ 48 लाख रूपये की राशि प्राप्त हुई है, जिसमें से 22 करोड़ 08 लाख रूपये की राशि का प्रयोग इस महामारी से निपटने के लिए किया गया।
    अन्य प्रदेशों में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देेनज़र प्रदेश सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए लॉकडाउन के कारण देश के दूसरे राज्यों में फंसे प्रदेश के लगभग 2.25 लाख लोगों को घर वापिस लाने का निर्णय लिया। प्रदेशवासियों के व्यापक हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना आवश्यक था।
    प्रदेश वापिस आए युवाओं के कौशल मैंपिंग के लिए ‘स्किल रजिस्टर’ पोटर्ल आरम्भ किया गया है, जिससे उन्हें रोज़गार के लिए उद्योगों से सीधे जोड़ा जा सकेगा। उनका कौशल विकास भी किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों के युवाओं को सुनिश्चित रोज़गार मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री शहरी रोज़गार गारण्टी योजना आरम्भ की गई है।
    कोविड-19 के कारण जनता से सीधा सम्पर्क बनाए रखने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जन समस्याओं का समाधान तथा जन योजनाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। आर्थिक गतिविधियाँ पुनः आरम्भ करने के लिए गठित मंत्रिमण्डलीय उप समिति द्वारा दिए जा रहे सुझावों के अनुसार कार्य किए जा रहे हैं।
    कोरोना महामारी के दौरान प्रदेशवासियों ने सरकार द्वारा समय-समय पर दिए गए दिशा-निर्देशों की अनुपालना कर जो सहयोग दिया है, उसके लिए मैं सबका आभार व्यक्त करता हूँ तथा अपील करता हूँ कि कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए मास्क आदि का अवश्य प्रयोग करें। सरकार कोरोना से निपटने के लिए कृतसंकल्प है। सरकार द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं और किसी को भी चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। परन्तु हमें सचेत और सतर्क रहने की आवश्यकता है।
    मैं प्रदेशवासियों को पुनः स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देता हूं तथा सबके स्वस्थ, सुखमय और समृद्ध जीवन की कामना करता हॅूं।
    जय हिन्द! जय हिमाचल!

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