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    Home»हिमाचल प्रदेश»पशुओं के साथ एक झोपड़ी में 25 वर्षों से रह रहा चार लोगों का परिवार
    हिमाचल प्रदेश

    पशुओं के साथ एक झोपड़ी में 25 वर्षों से रह रहा चार लोगों का परिवार

    By Himachal VartaMarch 3, 2021
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    21वीं सदी में भी नारकीय जीवन जीने को विवश बुजुर्ग दंपति

    नाहन (हिमाचलवार्ता)। एक तरफ तो सरकार राज्य के हर परिवार को आवास सुविधा देने की बात करती है, दूसरी और जिला सिरमौर के संगड़ाह विकास खंड की ग्राम पंचायत मायना घडेल के कांडो गांव  के बुजुर्ग दंपति आज भी नारकीय जीवन जीने को विवश है।

    आलम यह है की आज भी यह बुजुर्ग दम्पति एक टूटी फूटी झोपडी में गुजर वसर कर रहे है बल्कि  पशुओं के साथ रहने को विवश है। हैरत की बात तो यह है कि यह परिवार 25 वर्षों से अपने मवेशियों के साथ एक टूटी – फूटी झोपड़ी में रह रहे है।

    सरकार ने गरीबों और असहाय लोगों के उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू की है , लेकिन आज तक इस परिवार को किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है। जिला सिरमौर की विधानसभा रेणुका के विकास खंड संगड़ाह की ग्राम पंचायत के मायना घडेल के कांडो गांव के गरीबी दम्पति गत  25 वर्षो से नारकीय जीवन जी रहे है।

    कांडों के वसीया राम ने बताया की वह 25  वर्ष ध्वनि पूर्व अपने परिवार से अलग हुए तो जमीन के छोटे से टुकड़े के अलावा कुछ भी नहीं था। जिस पर उन्होंने यह झोपडी बनाई। इस झोपड़ी में चार परिवार के सदस्य के अलावा दो बकरी और एक गाय भी इसी झोपड़ी में बंधी है।

    बसिया राम की 65 वर्षीय पत्नी जो की चलने फिरने में असमर्थ है और दो बेटों के साथ पशुओं के ओबरे में यह लोग नर्क से भी बदत्तर जीवन व्यतीत कर रहे है। मजेदार बात तो यह है की हिमाचल सरकार और जिला प्रशासन ने सिरमौर को खुले में शौचमुक्त कर रखा है लेकिन कांडों के इस परिवार के पास शौचालय की सुविधा भी नहीं है। इससे साफ जाहिर है की सरकार की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर रही है।

    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि नेता या जन प्रतिनिधि इस परिवार की हालत के बारे में नहीं जानते। मगर आश्वासन और वायदे देने के बाद इन्हें कोई नहीं पूछता। 70 वर्षीय वसिया राम का कहना है कि अब इस झोपडी में उनका जी घबराता है। बरसात में अंदर पानी भर जाता है। उन्होंने सरकार से मदद मांगी है। मगर उन्हें कोई भी सरकारी सुविधा नहीं मिल पाई है। हैरानी वाली बात तो यह है कि वसिया राम को अभी तक बीपीएल की सूची में भी नहीं डाला गया है।

    कांग्रेस के वर्तमान विधायक और पूर्व सीपीएस विनय कुमार ने भी नहीं ली सुध

    हैरान करने वाली बात तो यह है कि कांग्रेस के वर्तमान विधायक विनय कुमार की पंचायत के रहने वाले बुजुर्ग दंपति की सुध कभी ना तो विनय कुमार ने ली और ना ही उनसे पहले सात बार एमएलए रहे डा. प्रेम सिंह ने भी कभी गरीब परिवार का हालचाल नहीं पूछा। लोगों का कहना है कि विनय कुमार कि विधानसभा के बाहर तो प्रदर्शन कर रहे है लेकिन अपनी ही पंचायत के गरीब परिवार का भला नहीं कर सके।

    मदद को आगे आये बड़का भाऊ  उर्फ़ संजय शर्मा प्रदेश के सामजसेवी बड़का भाऊ उर्फ़ संजय शर्मा को जब पता चला की रेणुका जी के संगड़ाह विकास खंड की ग्राम पंचायत मायना घडेल के कांडो गांव  के बुजुर्ग दम्पति नारकीय जीवन जी रहे है तो वह उनके घर पहुंचे और उनका दर्द साँझा किया।

    बड़का भाऊ ने बुजुर्ग दंपति को कुछ राशन दिया और भविष्य में मदद का आश्वासन दिया। साथ ही जिला प्रशासन को चेतावनी दी की यदि एक माह के भीतर बुजुर्ग दंपति को सरकार द्वारा घर की व्यवस्था नही की तो वह परिवार को मवेशियों सहित बीडीओ कार्यालय ले जाएंगे।  अब देखना यह है कि क्या सरकार या फिर कोई सामाजिक संगठन बुजुर्ग दंपति की मदद के लिए आगे आता है या फिर वही ढाक के तीन पात होंगे

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