महाराणा प्रताप ने धर्म रक्षणार्थ अपना सर्वस्व न्यौछावर किया नमन-डा. बिन्दल
नाहन-(हिमाचलवार्ता)। विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिन्दल ने आज महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर नाहन के माल रोड़ स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्र्यापण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राजपूत सभा नाहन द्वारा इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष विनय गुप्ता,राजपूत सभा के अध्यक्ष सुखदेव चैहान, भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रताप ठाकुर, नगर परिषद अध्यक्ष श्यामा पुंडीर, नगर परिषद के पार्षदगण व राजपूत सभा के गणमान्य सदस्य भी उपस्थित रहे।
अपने सम्बोधन में डा. राजीव बिन्दल ने कहा कि धर्म रक्षणार्थ अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले महाराणा प्रताप को आज के दिन संपूर्ण राष्ट्र श्रद्धांजलि देते हुए शत-शत नमन कर रहा है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप पराक्रम, त्याग, तपस्या और बलिदान की प्रतिमूर्ति हैं जिनके बलिदान को सदियों तक स्मरण किया जाएगा।
डा. बिन्दल ने कहा कि राजस्थान राजाओं और महाराणाओं से भरा था। धन-धान्य, सुख ऐश्वर्य से भरपूर था, परन्तु महाराणा प्रताप अपने त्याग व बलिदान के कारण महाराणा कहलाए, भारतवासियों के हृदय सम्राट बन गए। चितौड़ का किला, जौहर की ज्वाला, हल्दीघाटी का युद्ध-भारत की आत्मा में समा गए।
उन्होंने कहा कि भारत भूमि में हजारों राजा-महाराजा हुए, शक्तिशाली हुए, धन संपदा से भरपूर हुए, जिन्होंने चतुर्दिक अपने राज्य का विस्तार किया वे इतिहास के पन्ने में तो दर्ज किए गए परन्तु भारत के जनमानस के हृदय सम्राट न बन सके। श्री राम चंद्र, माता सीता, लक्ष्मण जी ने 14 वर्ष का बनवास काटा, त्याग किया, तपस्या की, राजगददी का बलिदान किया, वे भारत की आत्मा बन गए।
गौतम बुद्ध ने राज पाठ त्यागा, धर्म का मार्ग अपनाया, भगवान बन गए। गुरूनानक देव जी महाराज ने त्याग किया तप किया, गुरू तेग बहादुर जी ने बलिदान दिया, गुरू गोविन्द सिंह जी ने सर्वस्व कुर्बान किया, ये पथ प्रदर्शक बन गए। स्वातंत्रय वीर सावरकर, वासुदेव बलवंत फडके, भगत सिंह, चंद शेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, अश्फाकुल्ला खान जैसे सैंकड़ों क्रांतिकारी वीरों ने त्याग किया, तप किया बलिदान दिया वे सब पूजनीय हो गए।
डा. बिन्दल ने कहा कि भारत राष्ट्र में त्यागी, तपस्वी, बलिदानी व्यक्ति को सदैव पूजा जाता है, सम्मान किया जाता है। हमारी आने वाली पीढ़ी को देश के महापुरूषों के जीवनदर्शन को अपना मार्गदर्शन बनाकर राष्ट्र और समाज सेवा के लिए अपने को अर्पण करना चाहिए।
डा. बिन्दल ने कहा कि राजस्थान राजाओं और महाराणाओं से भरा था। धन-धान्य, सुख ऐश्वर्य से भरपूर था, परन्तु महाराणा प्रताप अपने त्याग व बलिदान के कारण महाराणा कहलाए, भारतवासियों के हृदय सम्राट बन गए। चितौड़ का किला, जौहर की ज्वाला, हल्दीघाटी का युद्ध-भारत की आत्मा में समा गए।
उन्होंने कहा कि भारत भूमि में हजारों राजा-महाराजा हुए, शक्तिशाली हुए, धन संपदा से भरपूर हुए, जिन्होंने चतुर्दिक अपने राज्य का विस्तार किया वे इतिहास के पन्ने में तो दर्ज किए गए परन्तु भारत के जनमानस के हृदय सम्राट न बन सके। श्री राम चंद्र, माता सीता, लक्ष्मण जी ने 14 वर्ष का बनवास काटा, त्याग किया, तपस्या की, राजगददी का बलिदान किया, वे भारत की आत्मा बन गए।
गौतम बुद्ध ने राज पाठ त्यागा, धर्म का मार्ग अपनाया, भगवान बन गए। गुरूनानक देव जी महाराज ने त्याग किया तप किया, गुरू तेग बहादुर जी ने बलिदान दिया, गुरू गोविन्द सिंह जी ने सर्वस्व कुर्बान किया, ये पथ प्रदर्शक बन गए। स्वातंत्रय वीर सावरकर, वासुदेव बलवंत फडके, भगत सिंह, चंद शेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, अश्फाकुल्ला खान जैसे सैंकड़ों क्रांतिकारी वीरों ने त्याग किया, तप किया बलिदान दिया वे सब पूजनीय हो गए।
डा. बिन्दल ने कहा कि भारत राष्ट्र में त्यागी, तपस्वी, बलिदानी व्यक्ति को सदैव पूजा जाता है, सम्मान किया जाता है। हमारी आने वाली पीढ़ी को देश के महापुरूषों के जीवनदर्शन को अपना मार्गदर्शन बनाकर राष्ट्र और समाज सेवा के लिए अपने को अर्पण करना चाहिए।
