नाहन (हिमाचलवार्ता)। कोरोना महामारी की दूसरी लहर से खौफजदा लोग आज भी बसों में सफर करने से कतरा रहे है। जिसका असर नाहन डिपो से चलने वाले एच.आर.टी.सी. की बसों में देखने को मिल रहा है।
जिला मुख्यालय नाहन डिपो से परिवहन निगम के 122 रूट सड़कों पर दौड़ रहे है। जिनमें से अधिकतर रूट खाली चल रहे है।
एचआरटीसी के नाहन डिपो से चलने वाले122 बस रूट घाटे में चल रहे है। सहायक बस अड्डा प्रभारी नाहन गिरीराज ने कहा कि अधिक्तर बस रूटों पर सवारियां नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में एक दिन की कमाई एच.आर.टी.सी. के नाहन डिपो को करीब 8 लाख रुपए हुआ करती थी। जो अब घटकर मात्र 2 से 3 लाख रह गई है। जिस कारण निगम को रोजाना करीब 5 लाख रुपए का घाटा झेलना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चलनेवाले बस रूटों पर चालक परिचालकों को रहने व खाने पीने संबंधित भी समस्याएं आ रही है। पहले ग्रामीण चालक परिचालक के लिए रहने व खाने पीने का इंतजाम किया करते थे।
लेकिन अब महामारी के डर से ग्रामीण चालक व परिचालक से दूरी बना रहे है। जिस कारण बसों में ही कर्मियों को सोना पड़ रहा है।
एचआरटीसी के नाहन डिपो के चालक रविंद्र सिंह ने बताया कि सराहां-नाहन-कालाअंब-त्रिलोकपुर एवं मंडीघडाना-सराहांआदि रूटों पर चल रही बसें खाली चल रही है। जिस कारण निगम को तेल का खर्च भी पूरी नहीं हो रहा है।
अगर बस बंद की जाए तो संबंधित पंचायत के प्रधान शिकायत करते है और मजबूरन बस चलानी पड़ती है। लेकिन सवारियों की बात करें तो वह कई रूटों पर नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले चालक परिचालक खाने पीने व रहने के लिए भी परेशानी झेल रहे है।
