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    Home»हिमाचल प्रदेश»झूठी सरकार के सामने गो संरक्षक पड़ा बोना,मानसिक रूप से किया जा रहा प्रताड़ित
    हिमाचल प्रदेश

    झूठी सरकार के सामने गो संरक्षक पड़ा बोना,मानसिक रूप से किया जा रहा प्रताड़ित

    By Himachal VartaSeptember 3, 2021
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    नाहन (हिमाचलवार्ता)। वीरवार को पांवटा विश्राम गृह में श्री सत्यानन्द गोधाम के संचालक, सचिन ओबराय ने प्रेस वार्ता की। जिसमें उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में गौ संवर्धन एवं गोवंश संरक्षण के लिए भले ही योजनाएं चलाई जा रही है। मगर सरकारी विभाग सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं।

    मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश गौ सेवा आयोग ने बेसहारा गायों और गोवंश के संरक्षण के लिए गौशालाओं को ₹500 प्रति गाय अनुदान का प्रावधान किया है। लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना सफेद हाथी साबित हो रही है।

    सचिन ने कहा कि शराब इत्यादि से एकत्रित करोड़ों रुपए के टैक्स से अभी तक ना तो सभी पंचायतों में गौशालाओं का निर्माण हो पाया है और ना ही सड़कों पर घूम रहे को बेसहारा गोवंश की व्यवस्था सरकारी को सदनों का गांव सेंचुरिज में हो पाई है।

    श्री सत्यानंद गोधाम पांवटा सरकारी योजना के असफलता का जीवंत उदाहरण बन गया है। मौके पर मौजूद गोधाम के संचालक सचिन ओबरॉय ने सरकारी दावों की पोल खोलते हुए बताया कि पशुपालन विभाग की ही सलाह पर वह पिछले 7 महीनों से अनुदान के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इनका मामला तिल भर भी आगे नही बढ़ पाया है।

    अखिल विश्व गौ एवं गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन के संयोजक नाथूराम चौहान ने कहा कि श्री सत्यानंद गोधाम को अनुदान मिलना चाहिए था।

    जिम्मेदार विभाग अनुदान देने में लगातार आनाकानी कर रहा है ऐसे हालात में तंग आकर गोधाम के संचालक सचिन ओबरॉय ने अनुदान लेने से ही इंकार कर दिया है।

    अखिल विश्व गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन परिषद के संयोजक नाथूराम चौहान ने सिस्टम को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार और विभागों को शर्म आनी चाहिए जिसको वंश और गो के नाम पर वोट मांग कर राजनीति करते हैं।

    उस गोवंश को सड़कों पर बेसहारा दर-दर की ठोकरें खाने के लिएंडर छोड़ा हुआ है। उन्होंने हैरानी जताई कि यदि कोई गौ भक्त गो एवं गोवंश संरक्षण के लिए प्रयास करता है तो उसे सरकारी विभागों द्वारा इस कदर प्रताड़ित किया जाता है कि वह अनुदान लेने से ही मना कर देता है।

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