नाहन 09 जुलाई(हिमाचल वार्ता न्यूज):-सिरमौर जिला की करीब 3 लाख की आबादी वाले समूचे गिरी पार क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति दर्जा दिए जाने की मांग पर आपत्ति जताते हुए गिरी पार अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति ने प्रधानमंत्री मोदी से इस बारे पुनर्विचार की मांग की। इस मुद्दे पर एसडीएम संगड़ाह के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे गए 5 पन्नों के ज्ञापन में समिति ने क्षेत्र की जातिगत अथवा सामाजिक हालात पर पुनर्विचार अथवा सर्वेक्षण करवाने की अपील की।
उन्होंने प्रधानमंत्री से यहां अनुसूचित जाति के पंचायती राज व विधानसभा चुनाव मे आरक्षण व एससी/एसटी एक्ट जैसे संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रखने की भी मांग की। ज्ञापन देने से पहले विश्राम गृह परिसर संगड़ाह में हुई अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति की बैठक में इकाई के अध्यक्ष एंव प्रधान परिषद संगड़ाह के उपाध्यक्ष विनोद कुमार, सचिव सुनील कुमार तथा सोम प्रकाश, जगत सिंह, बलवीर, अमिता व कामरेड अमरचंद आदि पदाधिकारियों के अलावा आधा दर्जन पंचायतों के अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में इस बात की भी चर्चा की गई कि गिरी पार की अधिकतर पंचायते विकास खंड शिलाई व संगड़ाह के अंतर्गत आती है, जहां बार-बार अनुसूचित जाति पर अत्याचार संबंधी मामले सामने आए हैं। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि, एससी के साथ-साथ ओबीसी को पंचायत चुनाव में मिलने वाला आरक्षण भी ट्रांसगिरि को अनुसूचित जनजाति दर्जा मिलने पर समाप्त हो जाएगा तथा वर्तमान मे अनुसुचित जाति के लिए आरक्षित रेणुकाजी व पच्छाद विधानसभा क्षेत्र भी एससी आरक्षित अथवा परोक्ष रुप से अनारक्षित हो सकते हैं।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि, आगामी 11 जुलाई को जिला मुख्यालय नाहन में गिरी पार के अनुसूचित जाति के लोगों द्वारा इस मुद्दे पर महासम्मेलन किया जा रहा है, जिसमें गिरी पार की लगभग सभी डेढ़ सौ के करीब पंचायतों से प्रतिभागी शामिल होंगे।
