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    सिरमौर

    राजगढ़ का आड़ू एशिया में स्वाद व किस्म में सबसे ज्यादा मशहूर

    By Himachal VartaJuly 11, 2022
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    नाहन 11 जुलाई (हिमाचल वार्ता न्यूज) :-  राजगढ़ क्षेत्र के  आड़ू, ने प्रदेश व देश की मंडियों में दस्तक देनी शुरू कर दी है । पीच वैली राजगढ़ से प्रतिदिन आड़ू, खुमानी, पल्म की पेटियां देश की विभिन्न मंडियों में पहूंच रही  है  । प्रसिद्ध बागवान शेरजंग चैहान के अनुसार सोलन व अन्य  फल मंडियों  में  आड़ू की करेट 15 सौं रूपये बिक रही है जिससे बागवान को अच्छा लाभ मिलने की संभावना है । उन्होने बताया कि  तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण विशेषकर सेब व आड़ू को काफी नुकसान पहूंचा है।  इसके बावजूद भी  आड़ू व पल्म की फसल औसतन ठीक रही है । विभाग के सूत्रों के अनुसार राजगढ़, संगड़ाह और पच्छाद ब्लाॅक में दो  करोड़ से अधिक नुकसान का आकलन किया गया है ।
    बता दें राजगढ़  का आड़ू उत्तम क्वालिटी, स्वाद, और साईज के लिए बहुत प्रसिद्ध माना जाता है जिस कारण राजगढ़़ की  पीच वैली के नाम से देश में एक अलग पहचान  है । विभागीय सूत्रों के अनुसार  पीच वैली राजगढ़ में  हर वर्ष औसतन छः हजार मिट्रिक टन आड़ू का उत्पादन होता है । यह जानकारी उद्यान विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ राजगढ़ डाॅ0 देवेन्द्र अत्री  ने  दी है । इनका कहना है कि राजगढ़ क्षेत्र में करीब तीन हजार हैक्टेयर भूमि पर आड़ू के बागीचे लगें है जिसमें आड़ू की जुलाई अलवर्टा  किस्म सर्वाधिक उत्पादित की जाती है । राजगढ़ वैली में हर वर्ष करीब 15 हजार मिट्रिक टन फलोत्पादन होता है जिसमें छः हजार मिट्रिक टन आड़ू, 3580 मिट्रिक टन पलम, चार हजार मिट्रिक टन सेब और  12 सौ मि0टन खुमानी का उत्पादन होता है।
    प्रगतिशील बागवान शेरजंग चैहान का कहना है कि इस वर्ष ओलावृष्टि के कारण आड़ू दागी हो गए थे जिससे बागवानों को काफी नुकसान हुआ है । बताया कि अभी तक मार्किट में आड़ू की अरली वेरायटी पहूंची है और जुलाई एलवर्टा किस्म के अतिरिक्त पल्म खुमानी  का सीजन भी आरंभ हो गया है । उन्होने बताया कि गत वर्ष के दौरान  असमय बारिश होेने व ओले गिरने से आड़ू की फसल में टफरीना रोग लग गया था जिससे आड़ू की फसल तबाह हो गई थी । बता दें कि अब राजगढ़ के बागवानों का रूझान  कम ऊंचाई वाले सेब के उत्पादन की ओर बढ़ रहा है । बीते वर्ष सर्दी के मौसम में किसानों द्वारा अपने खेतों में सैंकड़ों की तादाद में सेब के पौधे लगाए गए। गौर रहे कि राजगढ़ का सेब देश की मंडियों में सबसे पहले पहूंचता है जिससे बागवानों को अच्छे दाम मिलते हैं ।

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