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    सिरमौर

    परकोलेशन वैल से ग्रामीणों को उपलब्ध होगा रोजाना हजारों लीटर शुद्ध पेयजल

    By Himachal VartaMarch 7, 2023
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    नाहन  ( हिमाचल वार्ता न्यूज):– राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के तहत जल शक्ति विभाग द्वारा विधानसभा क्षेत्र के बिक्र म बाग व बरमापापडी पचांयत के  क्षेत्रों में निर्माणाधीन परकोलेशन वैल से ग्रामीणों को जल्द ही रोजाना हजारों लीटर शुद्ध पेयजल उनके घर द्वार पर उपलब्ध होगा। परकोलेशन वैल शुरू होने से क्षेत्र के दर्जनों गांव के  हजारों ग्रामीणों दकदीर बदलेगी जो साल भर  पेयजल संक ट से जुझतेरहेहैविभागअढाईकारोड़कीलागतसेखजूरना,ढाकवाला,देवनी,बिक्रमबाग व बरमापापड़ी गांवों में ऐसे 7 परकोलेशन वैलों का निर्माण करवा रहा है। परकोलेशन वैल के लिए, विभाग को 14 से 24 एलपीएस जल प्राप्त होगा है। विभाग के योग्य अधिकारियों की टीम ने इस प्रयोग को सफल बनाया है। कुछ साल पहले भू.जल वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में जगह जगह सर्वेक्षण कराया था। भविष्य में अब तस्वीर और ग्रामीणों की तकदीर बदलेगी। विभाग के अनुसार इनमें ज्यादातर कुओं को जमीन में उतारने का काम चल रहा है। नाहन विधान सभा क्षेत्र के निचले इलाकों में नदी नालों में बरसात के मौसम में भारी पानी आता है। बाढ जैसे हालात होते है। खेत खलियान बहने लगते हैं परन्तु जैसे ही बरसात का मौसम समाप्त होता है सभी नदी नालें सूख जाते है।आस-पास के ग्रामीण पेयजल के लिए भी महरूम हो जाते है। ग्रामीणों को ऐसे समय में लगातार पेयजल उपलब्ध करवाने की दृष्टि से कुछ साल पहले भू.जल वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में जगह जगह सर्वेक्षण कराया गया। अनेक स्थानों पर टयूबवैल बोर कराए गए परन्तु नतीजा यह रहा की हर बोर में एक इंच या दो इंच पानी वह भी स्थाई नहीं मिला।मारकण्डा नदी व मारकण्डा नदी की सहायक नदियां जैसे रूण, सलानी, नीमवाली नदी में गहरा भू.जल प्राप्त नहीं हुआ। केवल तलहटी में आ कर कालाअंब, खैरी, त्रिलोकपुर के कुछ इलाके व बाता नदी के क्षेत्र में ही ट्यूबवैल में कामयाबी मिली। लगातार वैज्ञानिकों की मदद लेने के बाद विभाग को रिपोर्ट हुआ कि इन क्षेत्रों में भूमिगत जल केवल 40 फुट की गहराई तक ही उपलब्ध है। उसके नीचे पथरीली परते होने के कारण 100 फु ट से 300 फु ट तक जल की उपलब्धता कम रहती है। इन सभी समस्याओं का समाधान परकोलेशन वैल के रूप में सामने आया।
    परकोलेशन वैल क्या है
    एक ऐसा कुंआ जिसमें पानी छन कर जाए यानि परकोलेट होकर नीचे जाए। यह सफ लतम् प्रयोग जल शक्ति विभाग नाहन डिवीजन ने क र दिखाया।  एक अद्वितीय प्रयोग है परकोलेशन वैल कंकरीट का एक कूंआ जिसे नदी के किनारे एक ऐसे स्थान पर बनाया जा रहा है जहां बारह महीने भूमि गत जल 20 से 40 फुट पर उपलब्ध है व 40 फुट के बाद जहाँ पथरीली परतें है। ऐसा स्थान जहाँ पर से क्षेत्र विशेष के लिए पानी उठाया जा सकता है। ये कूंआ सामान्य कूंआ नहीं है। न ही केवल सीमेंट कंकरीट का सामान्य कूंआ है। इस कूंए में फिलटरेशन वॉल बनाई गई है जो लगभग एक फु ट मोटी कंकरीट की छलनी की तरह हैं जिनमें से पानी छन कर कूंए में स्टोर हो रहा है। पम्प लगा कर स्वच्छ पेयजल इलाका वासियों तक पहुंचाया जाएगा। विभाग ने इस योजना में सफलता हासिल की। – करीब अढाई कारोड़ की लागत से बिक्रमबाग व बरमापापड़ी क्षेत्र में ऐसे 7 परकोलेशन वैलों का निर्माण करवाया जा रहा है। कु छ साल पहले इस क्षेत्र में जगह-जगह विभाग भू जल का स्तर जांचने के व्यापक स्तर सर्वे करवाया था। निर्माण राशि राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के तहत खर्च हो रही है।

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