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    Home»हिमाचल प्रदेश»ऊना»हर साल करोड़ों की आमदन करने वाले मंदिरों में सुविधाओं के नाम पर वर्षों पुराने इंतजाम
    ऊना

    हर साल करोड़ों की आमदन करने वाले मंदिरों में सुविधाओं के नाम पर वर्षों पुराने इंतजाम

    By Himachal VartaJune 13, 2023
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    हिमाचल वार्ता न्यूज़

    ऊना (हिमाचल वार्ता न्यूज़ )   प्रदेश के शक्तिपीठ देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के श्रद्धा का केंद्र बने हुए हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु प्रदेश के शक्तिपीठों, चिंतपूर्णी मंदिर, मां ब्रजेश्वरी देवी,मां चामुंडा देवी,मां ज्वालामुखी, नयनादेवी, मां बाला सुदंरी व बाबा बालक नाथ में माथा टेकने आते हैं। श्रद्धालुओं के चढ़ावे से ही इन शक्तिपीठों की आय हर साल करोड़ों रुपए में होती है,लेकिन लाखों लोगों की आस्था के प्रतीक स्वरूप चढ़े चढ़ावे का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। करोड़ों की आमदन होने के बावजूद न तो श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं को जुटाया जा सका है, न ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत ढांचे को विकसित करने के लिए मंदिर ट्रस्ट कोई दीर्घकालीन योजनाओं को मूर्तरूप दे पाए हैं। ऊना-कांगड़ा सीमा पर स्थित माता चिंतपूर्णी मंदिर में हर साल पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी व देश के अन्य राज्यों से लाखों श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। मंदिर में चढ़ावे, लंगर में दान व मंदिर की जमा पूंजी पर बैंकों से मिलने वाले ब्याज के रूप में हर साल कुल आय करीब 30 करोड़ के आसपास होती है। मंदिर ट्रस्ट विभिन्न मदों पर करीब 20 से 25 करोड़ रुपए की राशि हर वर्ष व्यय करता है। मंदिर न्यास के तहत पांच दर्जन के करीब अधिकारी व कर्मचारी तैनात हैं, जबकि छह दर्जन के करीब गृहरक्षक व भूतपूर्व सैनिक भी मंदिर के सुरक्षा प्रबंधों के लिए तैनात किए गए हैं। इन सबके वेतन-भत्तों पर ही मंदिर न्यास हर साल करीब तीन करोड़ रुपए की राशि खर्च करता है। करीब आठ से दस करोड़ रुपए पुजारियों को उनके चढ़ावे में हिस्से के रूप में दिया जा रहा है। करीब एक करोड़ रुपए की राशि लंंगर पर खर्च होती है। सफाई व्यवस्था पर 25 लाख रुपए के करीब साल में खर्च किया जा रहा है। मंदिर न्यास ने भरवाई में यात्री भवन भी बना रखा है। जिसके रखरखाव पर मंदिर न्यास को भारी राशि व्यय करनी पड़ रही है। मंदिर न्यास पिछले लंबे अरसे से चिंतपूर्णी मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मास्टर प्लान को लागू करने का प्रयास कर रहा है। बस अड्डे के पास एडीबी की वित्तपोषित योजना के तहत पार्किंग व अन्य जन सुविधाएं विकसित जरूर की गई है। मंदिर परिसर में मास्टर प्लान को लागू करना, बाजार में नई भूमि खरीद कर सुविधाएं जुटाने, क्षेत्र में करीब 12 करोड़ रुपए की सीवरेज योजना, पेयजल क्षमता को बढ़ाने के लिए जलशक्ति के साथ मिलकर योजना इत्यादि योजनाएं मूर्तरूप लेने का इंतजार कर रही है।

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