मंडी ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ) अमेरिका में पाए जाने वाले औषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा बारबाडेंसिस मिलर (ए एल वन प्रजाति) की खेती अब किसानों को मालामाल करेगी। जाइका वानिकी परियोजना के तहत सुंदरनगर के ध्वाल व हराबाग में इस वेरायटी के पचास हजार पौधे लगाए गए हैं। जूस तैयार करने वाली हमीरपुर की एक निजी कंपनी के साथ एमओयू साइन किया गया है।कंपनी एलोवेरा के प्लांट उपलब्ध करवाने के साथ-साथ उत्पादकों से इसकी पत्तियों की खरीद करेगी। कंपनी अपने स्तर पर जूस का उत्पादन करने के साथ-साथ दूसरे देशों की कंपनियों को भी उत्पाद का निर्यात करती है। विभिन्न प्रकार के जूस व दवाइयों में एलोवेरा की इस प्रजाति का इस्तेमाल किया जाता है। निजी कंपनी की ओर से वानिकी परियोजना के तहत इस प्रजाति के पचास हजार पौधे उपलब्ध करवाए हैं।
दो साल में तैयार होता है पौधा, उसके बाद किसानों को राहतबता दें कि यह पौधा दो साल में तैयार हो जाता है। इसके बाद प्रत्येक साल में तीन बार इस पौधे से पत्तियों को निकाला जाता है। बड़ी बात यह है कि एक बार पौधा रोपने के बाद 12 से 15 साल तक इससे किसान को उत्पादन होता रहता है। पत्तियों के अलावा पौधों से बेबी प्लांट्स भी निकलते हैं। इन बेबी प्लांट्स को अन्य खेत में रोप कर खेती की जा सकती है। बेबी प्लांट्स को बेच कर भी अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।
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Monday, October 5
