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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»विकसित कृषि से ही साकार होगी विकसित भारत की परिकल्पना
    सिरमौर

    विकसित कृषि से ही साकार होगी विकसित भारत की परिकल्पना

    By Himachal VartaJune 6, 2025
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     नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज़):- भारतीय कृषि निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है और देश की समृद्धि का आधार कृषि और किसान हैं इसी परिकल्पना को साकार करने के लिए जिला सिरमौर के विभिन्न गावों में विकसित कृषि संकल्प अभियान” के तहत जारी है कृषि संवाद एवं जागरूकता शिविरों का आयोजन। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशन में पूरे देश में चलाए जा रहे ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर, कृषि विभाग एवं कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) की अलग अलग टीमों ने जिला सिरमौर के विभिन्न गांवों मटक माजरी, मुगला वाला, डांडा, कमरऊ , जबरोग , बकरास , कुफ्टू , देवका पुंडला , जामली , फतेहपुर, काशीपुर , रामनगर , कांड , कटाह शीतला , जरवा , खोजर और रेडली  गांवों में कृषि संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जिनमें भारी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
    जिला सिरमौर के कृषि उपनिदेशक डॉ राजकुमार, आत्मा के परियोजना निदेशक डॉ साहब सिंह और कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि इन  शिविरों  के माध्यम से केंद्र के वैज्ञानिकों  के साथ साथ कृषि विभाग और आत्मा के अधिकारी भी प्रतिदिन जिला सिरमौर  के अलग अलग गावों में जा कर किसानों के साथ परिचर्चा कर रहे है और विभिन्न सरकारी योजनाओं-प्राकृतिक खेती, प्राकृतिक खेती, मृदा  स्वास्थ्य कार्ड, उच्च तकनीक बागवानी, पशुधन प्रबंधन, और विभिन्न सरकारी योजनाओं व अनुदानों की जानकारी जानकारी दे रहे है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर किसानों के साथ चर्चा के दौरान उनकी कृषि सम्बन्धी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
    संगड़ाह उपमंडल की रेडली पंचायत में भी कृषि अधिकारियों ने अपने सम्बोधन में कहा की सरकार किसानो  की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है ताकि किसानों की आर्थिकी मजबूत हो और उनके उत्पाद को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित दाम मिले इसके लिए वैज्ञानिक खेती करने का आहवाहन किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए किसानों का आह्वान किया और कहा की पर्यावरण हितैषी और मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए उत्तम खेती को अपना कर ही किसान अपनी खेती की लागत में कमी लाने के साथ साथ गुणवत्तायुक्त उत्पाद भी तैयार कर सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं । इन शिविरों के माध्यम से किसानों को खरीफ मौसम में उगाई जाने वाली विभिन्न फसलों और उनकी खेती में अपनाई जाने वाली उन्नत वैज्ञानिक विधियों के बारे में  विशेष रूप से जानकारी प्रदान की जा रही है और इससे सम्बंधित प्रकाशन सामग्री भी उपलब्ध करवाई जा रही है !
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