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    Home»हिमाचल प्रदेश»हमीरपुर»हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन : सरकार की दूरदर्शी नीतियों से बढ़ी आपदा प्रतिरोधक क्षमता
    हमीरपुर

    हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन : सरकार की दूरदर्शी नीतियों से बढ़ी आपदा प्रतिरोधक क्षमता

    By Himachal VartaJanuary 3, 2026
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    हमीरपुर ( हिमाचल वार्ता न्यूज) ( राजन कुमार शर्मा)हिमाचल प्रदेश अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2016 से 2025 के बीच इस क्षेत्र में व्यापक और दूरदर्शी सुधार किए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य की आपदाओं से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य सरकार द्वारा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत सशक्त किया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्राधिकरण को एक समन्वित, योजनाबद्ध और तकनीक-समर्थित संस्था के रूप में विकसित किया गया, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और त्वरित बनी। राज्य, जिला एवं उप-मंडल स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाएँ तैयार कर उन्हें नियमित रूप से अद्यतन किया गया। आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल का गठन एवं सुदृढ़ीकरण किया गया। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से बाढ़, भूस्खलन, भूकंप और अन्य आपात स्थितियों में त्वरित बचाव एवं राहत कार्य संभव हुए। सेना एवं अन्य केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से ऑपरेशन जल राहत-2 जैसे बड़े राहत अभियान भी सफलतापूर्वक संचालित किए गए। सरकार ने आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। भौगोलिक सूचना तंत्र, ड्रोन सर्वेक्षण, मौसम निगरानी, रियल-टाइम डेटा संग्रह और अर्ली वार्निंग सिस्टम के माध्यम से भारी वर्षा, बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं से पूर्व चेतावनी देना संभव हुआ। मोबाइल अलर्ट सिस्टम से आम नागरिकों तक समय पर सूचना पहुँचाई गई, जिससे जान-माल की क्षति में कमी आई। जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर खतरा-जोखिम-भेद्यता एटलस तैयार किया गया है। भूकंपरोधी निर्माण, सुरक्षित भवन दिशानिर्देश, ढलानों के स्थिरीकरण और पर्यावरण-संतुलित विकास पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके। आपदा के बाद प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता, विशेष राहत पैकेज, आवास पुनर्निर्माण और आजीविका बहाली उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। इससे आपदा प्रभावित लोगों को समय पर संबल मिला और सामान्य जीवन की ओर वापसी संभव हो सकी। साथ ही, सरकार ने सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता को आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाया है। पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों, स्थानीय समुदायों और नागरिकों को आपदा-पूर्व तैयारी और बचाव कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल किया गया। स्कूलों व संस्थानों में मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए गए। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा हर वर्ष अक्टूबर माह में “समर्थ-2025” जैसी जन-जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है। समग्र रूप से, वर्ष 2016 से 2025 के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन को राहत-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर पूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, त्वरित प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक पुनर्वास पर आधारित एक सशक्त प्रणाली के रूप में विकसित किया है। यह न केवल राज्य को वर्तमान आपदाओं से निपटने में सक्षम बनाती है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी हिमाचल प्रदेश को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

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