ऊना( हिमाचल वार्ता न्यूज) हरोली विधानसभा क्षेत्र में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की जा रही है। क्षेत्र के प्राचीन तालाबों (टोबों) को पुनर्जीवित कर उन्हें आधुनिक, सुंदर एवं बहुउद्देशीय सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है। यह पहल न केवल पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है।
हरोली के विधायक एवं उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की दूरदर्शी सोच और जनहितकारी दृष्टिकोण के चलते वर्षों पुराने टोबों को नया जीवन मिल रहा है। जहां देश के अनेक हिस्से गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं हरोली में जल संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक, दूरगामी और सतत मॉडल विकसित हो रहा है। हरोली क्षेत्र में गांव-गांव फैले पारंपरिक तालाब, जिन्हें स्थानीय भाषा में टोबे कहा जाता है, कभी वर्षा जल संग्रहण, पशुओं के पेयजल और सिंचाई का प्रमुख साधन हुआ करते थे। समय के साथ बदलती जीवनशैली और देखरेख के अभाव में ये जल स्रोत उपेक्षित हो गए थे। ऐसे में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इन पारंपरिक जल स्रोतों के महत्व को समझते हुए इनके पुनरुद्धार की एक ठोस और सुनियोजित
इन तालाबों को अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनः जल से लबालब किया जा रहा है। साथ ही इन्हें आकर्षक सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि ये जल संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण, जलीय जीवन, ग्रामीण पर्यटन और पंचायतों की संभावित आय का माध्यम भी बन सकें। हरोली में तालाबों के संरक्षण और संवर्धन के प्रयास कोई नए नहीं हैं, बल्कि यह कार्य मुकेश अग्निहोत्री के पहले विधायक कार्यकाल से ही निरंतर जारी है। वर्तमान समय में इन प्रयासों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी रूप दिया गया है। यह मॉडल आज पूरे प्रदेश के लिए जल संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बनता जा रहा है।
