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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»घर बैठे रोजगार का सशक्त माध्यम बनी प्रदेश सरकार की बैकयार्ड पोल्ट्री स्कीम
    सिरमौर

    घर बैठे रोजगार का सशक्त माध्यम बनी प्रदेश सरकार की बैकयार्ड पोल्ट्री स्कीम

    By Himachal VartaMarch 12, 2026
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    नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज)प्रदेश के ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालन विभाग के माध्यम से बैकयार्ड पोल्ट्री योजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिला सिरमौर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में ग्रामीण परिवार स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
    सरकार की बैकयार्ड पोल्ट्री योजना ग्रामीण परिवारों के लिए आय का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना लोगों को आय से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ कम लागत में अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी प्रदान कर रही है, जिससे पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल रही है।
    उर्वशी, प्रदीप कुमार तथा मुकेश जैसे लाभार्थी पहले आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। सीमित संसाधनों और आय के अभाव में जीवन-यापन कठिन था। बैकयार्ड पोल्ट्री स्कीम से जुड़ने के बाद उनकी स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है और यह योजना उनके लिए आजीविका का एक भरोसेमंद साधन बनी है।
    बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के लाभार्थि मुकेश ने बताया कि वे पिछले कुछ वर्षों से नाहन हैचरी के साथ निरंतर जुड़े हुए हैं। प्रत्येक हैच से वह 200 से 250 चूजे प्राप्त करते हैं। उन्होंने बताया कि यहां तैयार किया गया चूजा बहुत अच्छी गुणवत्ता का होता है और उसका विकास भी शीघ्र गति से होता है। उन्होंने बताया कि बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के अंतर्गत उन्हें समय पर चूजे उपलब्ध हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन चूजों को पालकर इनसे प्राप्त अंडों से चूजे तैयार करते है। इस योजना से उनकी आय के स्रोतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और अंडों की बिक्री से भी उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।
    सराहां निवासी, प्रदीप कुमार का कहना है कि उन्होंने  इस योजना के अंतर्गत नाहन हैचरी से चूजे प्राप्त किए हैं। इन चूजों की देखभाल उनके परिवार द्वारा की जाएगी, जिसमें उनकी पत्नी मुख्य भूमिका निभाएंगी। वे स्वयं कृषि कार्य के साथ-साथ मजदूरी करते हैं, जबकि पोल्ट्री से संबंधित कार्य उनकी पत्नी संभालेंगी। इस योजना से उनके परिवार की आर्थिकी और अधिक सुदृढ़ होगी।
    इसी प्रकार उर्वशी, निवासी पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने बताया कि वह और उनका परिवार प्रारंभ से ही बैकयार्ड पोल्ट्री स्कीम का लाभ ले रहे हैं। इस योजना के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है तथा उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय कदम बताते हुए प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
    बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के तहत नाहन से सिरमौर, सोलन, ऊना, किन्नौर और शिमला-इन पांच जिलों में चूजों का वितरण किया जा रहा है। एक वर्ष में लगभग 2 लाख एक दिवसीय चूजों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक एक दिवसीय चूजा मात्र 32 रुपये की दर से उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें मैरिक्स प्रोटेक्शन वैक्सीन पहले से लगाई जाती है।
    पोल्ट्री उत्पादन को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से नई मॉडल हैचरी का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 65 सप्ताह तक पालित मुर्गियों के अंडों से चूजे तैयार कर प्रदेश के विभिन्न जिलों में वितरित किए जाते हैं। योजना के अंतर्गत मुर्गी पालकों को एक दिवसीय प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है, जिससे लाभार्थी वैज्ञानिक तरीके से पोल्ट्री पालन कर सकें। प्रतिवर्ष लगभग 900 पशुपालकों  को मुर्गी पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि गते वर्ष 1145 लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
    आज बैकयार्ड पोल्ट्री स्कीम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पोल्ट्री पालन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस योजना से न केवल अंडा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि लोगों को कम लागत में बेहतर पोषण भी मिल रहा है। पोल्ट्री से प्राप्त खाद का उपयोग किसान खेती और मशरूम उत्पादन में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित हो रहे हैं। यह योजना वास्तव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और जिला सिरमौर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार बन चुकी है।

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