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    Home»हिमाचल प्रदेश»हमीरपुर»पर्यावरण-अनुकूल विकास: संकटों के बीच समृद्ध हिमाचल का नया ब्लूप्रिंट
    हमीरपुर

    पर्यावरण-अनुकूल विकास: संकटों के बीच समृद्ध हिमाचल का नया ब्लूप्रिंट

    By Himachal VartaJune 3, 2026
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    हमीरपुर ( हिमाचल वार्ता न्यूज) ( राजन कुमार शर्मा) हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जितना प्रसिद्ध है, भौगोलिक रूप से उतना ही संवेदनशील भी है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने कई बड़े भूस्खलन, बादल फटने और अचानक आई बाढ़ का सामना किया है। ऐसे में प्रदेश के लिए पर्यावरण आपदा प्रबंधन और सतत विकास केवल दो शब्द नहीं, बल्कि अस्तित्व की जरूरत बन चुके हैं। अत्यधिक और अनियमित वर्षा: जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में बहुत भारी बारिश होना (जैसे बादल फटना) आम हो गया है। पिछले तीन वर्षों में ही राज्य ने 66 से अधिक बादल फटने और 121 से अधिक अचानक आई बाढ़ की घटनाओं को झेला है। अवैज्ञानिक निर्माण कार्य: सड़कों को चौड़ा करने के लिए पहाड़ों की खड़ी कटाई और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए की जाने वाली ब्लास्टिंग से पहाड़ कमजोर हो रहे हैं, जिससे भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।पहले आपदा प्रबंधन का मतलब सिर्फ ‘आपदा के बाद राहत सामग्री बांटना’ होता था। लेकिन अब हिमाचल सरकार अपनी नीति को “आपदा पूर्व तैयारी और लचीलेपन ‘(लचीलेपन-केंद्रित शासन)’ पर केंद्रित कर रही है।  HP-READY प्रोजेक्ट (2026-2030): राज्य सरकार ने हाल ही में ₹2,688 करोड़ का हिमाचल प्रदेश विकास और आपदा रिकवरी के लिए सुदृढ़ कार्रवाई (HP-READY) प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य आपदाओं से निपटने के लिए ग्रामीण स्तर तक तैयारियों को मजबूत करना और ऐसा बुनियादी ढांचा (infrastructure) बनाना है जो झटके सह सके। अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System): आईआईटी मंडी (IIT Mandi) के सहयोग से प्रदेश के संवेदनशील जिलों (जैसे सिरमौर, कांगड़ा, मंडी, किन्नौर) में कम लागत वाले भूस्खलन सेंसर लगाए गए हैं, जो ढलान खिसकने से पहले ही चेतावनी दे देते हैं। डिजिटल तकनीक: ‘स्कूल सुरक्षा प्रबंधन सूचना तंत्र’ जैसे मोबाइल ऐप के जरिए हजारों स्कूलों ने अपनी आपदा प्रबंधन योजनाएं ऑनलाइन तैयार की हैं ताकि बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके। आपातकाल के लिए 1077 और 1070 जैसे टोल-फ्री नंबर एक्टिव हैं। हिमाचल प्रदेश ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में देश में हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। हाल ही में जारी हिमाचल प्रदेश मानव विकास रिपोर्ट (2025) में स्पष्ट किया गया है कि पर्यावरण को बचाए बिना विकास संभव नहीं है। सतत विकास के लिए राज्य सरकार निम्नलिखित रणनीतियों पर काम कर रही है:प्रदूषण नियंत्रण ब्लैक कार्बन और मीथेन जैसी ‘सुपर क्लाइमेट प्रदूषकों’ (Non-CO₂ Emissions) को कम करने के लिए एक व्यापक रोडमैप लॉन्च किया गया है, ताकि ग्लेशियरों को पिघलने से बचाया जा सके। हरित शहर ‘शहरी चुनौती कोष’ (Urban Challenge Fund) के तहत शहरों में स्मार्ट हाइड्रोलिक पार्किंग, स्काईवॉक और क्लस्टर-आधारित ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) किया जा रहा है।

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