Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Breakng
    • राजगढ़ के शिरगुल महाराज का बैसाखी मेला बना राज्य स्तरीय
    • 100 बिस्तरों वाले हरोली अस्पताल के विस्तार को रफ्तार, अतिरिक्त भवन के लिए 8.42 करोड़ मंजूर*
    • शिमला में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं।
    • द्राबिल में विश्व पर्यावरण दिवस तथा मिशन शक्ति योजना पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
    • 129 पदों के लिए कैंपस इंटरव्यू 11 व 12 जून को
    • कैम्पस इंटरव्यू
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Himachal Varta
    • होम पेज
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सिरमौर
      • ऊना
      • चंबा
      • लाहौल स्पीति
      • बिलासपुर
      • मंडी
      • सोलन
      • कुल्लू
      • हमीरपुर
      • किन्नोर
      • कांगड़ा
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • चण्डीगढ़
    • क्राइम
    • दुर्घटनाएं
    • पंजाब
    • आस्था
    • देश
    • हरियाणा
    • राजनैतिक
    Sunday, June 7
    Himachal Varta
    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»राजगढ़ के शिरगुल महाराज का बैसाखी मेला बना राज्य स्तरीय
    सिरमौर

    राजगढ़ के शिरगुल महाराज का बैसाखी मेला बना राज्य स्तरीय

    By Himachal VartaJune 7, 2026
    Facebook WhatsApp
    नाहन( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):-सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र के लिए गर्व और खुशी की खबर है। क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक माने जाने वाले शिरगुल देवता बैसाखी मेले को हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान कर दिया है। प्रदेश मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और लोग इसे राजगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली बड़ी मान्यता के रूप में देख रहे हैं।राजगढ़ का बैसाखी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सिरमौर, शिमला और सोलन जिलों के बिशू मेलों की परंपरा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। आराध्य देव शिरगुल महाराज से जुड़ा यह मेला दशकों से लोक आस्था, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का केंद्र रहा है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर न केवल धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति का भी साक्षी बनते हैं। मेले का इतिहास भी बेहद रोचक और गौरवशाली रहा है। स्थानीय इतिहास के अनुसार करीब 75 वर्ष पूर्व यह मेला वर्तमान ग्राम पंचायत बोहल-टालिया के अंतर्गत कुफरधार में आयोजित किया जाता था। उस समय चीड़ के घने जंगलों और प्राकृतिक जल स्रोत के समीप लगने वाला यह मेला क्षेत्र की सबसे बड़ी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल था। बाद में बढ़ती भागीदारी और क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए इसे राजगढ़ की सरोट पहाड़ी में स्थानांतरित किया गया।सरोट पहाड़ी में वर्षों तक मेले का आयोजन होता रहा और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। बताया जाता है कि उस दौर में प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल भी मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
    Follow on Google News Follow on Facebook
    Share. Facebook Twitter Email WhatsApp
    Recent
    • राजगढ़ के शिरगुल महाराज का बैसाखी मेला बना राज्य स्तरीय
    • 100 बिस्तरों वाले हरोली अस्पताल के विस्तार को रफ्तार, अतिरिक्त भवन के लिए 8.42 करोड़ मंजूर*
    • शिमला में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं।
    • द्राबिल में विश्व पर्यावरण दिवस तथा मिशन शक्ति योजना पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
    • 129 पदों के लिए कैंपस इंटरव्यू 11 व 12 जून को
    Recent Comments
    • Sandeep Sharma on केन्द्र ने हिमालयी राज्यों को पुनः 90ः10 अनुपात में धन उपलब्ध करवाने की मांग को स्वीकार किया
    • Sajan Aggarwal on ददाहू मैं बिजली आपूर्ति में घोर अन्याय
    © 2026 Himachal Varta. Developed by DasKreative.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.