नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):-सतकुम्भा शिवालिक पर्वतमाला के घने और सुनसान जंगलों के बीच स्थित प्राचीन सतकुम्भा तीर्थ धार्मिक एवं आध्यात्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि इसी स्थान पर महर्षि मार्कण्डेय ने तपस्या की थी और पंचमुखी शिवलिंग की स्थापना की थी। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस तीर्थ में आज भी श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचकर स्नान, जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। तीर्थ स्थल पर पंचमुखी शिवलिंग के समीप सात जलधाराओं को समेटे एक प्राचीन बावड़ी स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि मार्कण्डेय प्रतिदिन इसी बावड़ी से जल लेकर पंचमुखी शिवलिंग का अभिषेक करते थे। यहां स्थित महर्षि मार्कण्डेय का प्राचीन धूना भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह तब से निरंतर चेतन है। सतकुम्भा की बावड़ी के जल को श्रद्धालु दिव्य और चमत्कारी मानते हैं। विशेष पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर बावड़ी में स्नान करते हैं और पंचमुखी शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। माघ और श्रावण मास के सोमवार, महाशिवरात्रि, मकर संक्रांति, सोमवती अमावस्या तथा बैसाखी के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। कई अवसरों पर श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। विशेष पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की ओर से भंडारों का आयोजन भी किया जाता है। तीर्थ स्थल पर श्रद्धालुओं के ठहरने तथा भंडारा तैयार करने के लिए पर्याप्त स्थान और बर्तन उपलब्ध हैं। तीर्थ स्थल के समीप एक प्राकृतिक जल प्रवाह भी मौजूद है, जिसमें वर्षभर पानी रहता है। स्थानीय साधु-संत और महात्मा इसे ‘आदि मार्कण्डेय’
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- सतकुम्भा के घने जंगलों में विराजमान है प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग, महर्षि मार्कण्डेय की तपोभूमि में उमड़ते हैं श्रद्धालु
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Monday, August 10
