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    सिरमौर

    नेपाल की त्रासदी को ‘चेतावनी’ मानने की जरूरत, हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते खतरे पर जताई चिंता : नाथूराम चौहान

    By Himachal VartaSeptember 1, 2026
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    नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):- नेपाल में हाल ही में सामने आई प्राकृतिक त्रासदी को पर्यावरणविद् नाथूराम चौहान ने हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी बताया है। दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप से जुड़े पर्यावरणीय विषयों पर पिछले करीब 10-12 वर्षों से काम कर रहे चौहान का कहना है कि नेपाल में हुई घटना को केवल एक अलग आपदा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि हिमालय में तेजी से हो रहे पर्यावरणीय बदलावों को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल पर्वतों की श्रृंखला नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के करोड़ों लोगों के लिए जल का प्रमुख स्रोत भी है। इस क्षेत्र से निकलने वाली नदियां विभिन्न देशों के बड़े हिस्से की जल जरूरतों को पूरा करती हैं। नाथूराम चौहान के अनुसार, हिमालय करीब 5.95 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला विशाल पर्वतीय क्षेत्र है, जो कई देशों से जुड़ा हुआ है। यहां बड़ी संख्या में ऊंची पर्वत चोटियां, ग्लेशियर और हिमनदीय झीलें मौजूद हैं। उन्होंने सियाचिन सहित हिमालय के विभिन्न हिमनदों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका महत्व केवल बर्फ के भंडार के तौर पर नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जल व्यवस्था के लिए भी है। चौहान का कहना है कि हिमनदों के तेजी से पिघलने और ग्लेशियर से जुड़ी झीलों के आकार में बदलाव को गंभीरता से समझना होगा। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियां भविष्य में अचानक बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
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