हमीरपुर( हिमाचल वार्ता न्यूज) ( राजकुमार शर्मा) हिमाचल प्रदेश की पहचान बर्फ से ढके पहाड़ों, देवदार के जंगलों, शांत घाटियों और सर्दियों की खूबसूरत वादियों से है। सर्दियों में प्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है, लेकिन इसी मौसम के साथ कई गंभीर आपदा जोखिम भी जुड़ जाते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन से लेकर मध्य एवं निचले हिमाचल में शीतलहर, कोहरा, सड़क दुर्घटनाएं, आगजनी, भू स्खलन, बिजली-पानी की आपूर्ति में व्यवधान और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियां प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों ने इन जोखिमों की प्रकृति को और जटिल बनाया है। मौसम का अचानक बदलना, असामान्य तापमान, कम अवधि में भारी वर्षा या बर्फबारी और लंबे समय तक शुष्क परिस्थितियां अब आपदा प्रबंधन की पारंपरिक तैयारियों को नए सिरे से देखने की मांग करती हैं। इसलिए सर्दियों में आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल बर्फ हटाना या दुर्घटना के बाद राहत पहुंचाना नहीं है। वास्तविक आवश्यकता है—पूर्व चेतावनी, जोखिम की पहचान, संवेदनशील आबादी की सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं की निरंतरता और समुदाय की तैयारी। हिमाचल प्रदेश में सर्दियों की चुनौतियां हर जिले में एक जैसी नहीं होतीं। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा और कुल्लू के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात, हिमस्खलन और अत्यधिक ठंड प्रमुख जोखिम हो सकते हैं। शिमला, मंडी, सिरमौर, सोलन और कांगड़ा के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के साथ भूस्खलन, सड़क अवरोध और बिजली-पानी की समस्या सामने आ सकती है। वहीं ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और प्रदेश के निचले क्षेत्रों में कोहरा, शीतलहर, सड़क दुर्घटनाएं, आगजनी और तापमान में अचानक गिरावट जैसे जोखिम अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अर्थात एक ही राज्य के लिए एक जैसी Winter Preparedness Strategy पर्याप्त नहीं होगी। जिला और स्थानीय स्तर पर जोखिम आधारित तैयारी आवश्यक है। ऊंचाई वाले हिमाचली क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। सड़कें बंद होना, बिजली एवं पेयजल आपूर्ति बाधित होना, संचार सेवाओं में व्यवधान और दूरदराज के गांवों का संपर्क कटना आम चुनौतियों में शामिल हैं। हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, पर्यटकों, निर्माण श्रमिकों और सड़क निर्माण एजेंसियों के लिए अतिरिक्त सावधानी आवश्यक है। ऐसे क्षेत्रों में प्रशासन को पहले से संवेदनशील मार्गों और बस्तियों की पहचान, आवश्यक मशीनरी की तैनाती, वैकल्पिक मार्ग, आपातकालीन संपर्क व्यवस्था और आवश्यक खाद्य एवं चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा तथा अन्य निचले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान सुबह और देर रात को घना कोहरा दृश्यता को काफी कम कर सकता है। राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों तथा प्रमुख संपर्क सड़कों पर तेज गति, गलत ओवरटेकिंग, अचानक लेन बदलना और पर्याप्त दूरी न रखना दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। कोहरे के दौरान वाहन चालकों को गति नियंत्रित रखने, लो-बीम हेडलाइट या उपयुक्त फॉग लैंप का प्रयोग करने और आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की आवश्यकता है। प्रशासन की ओर से दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान, रिफ्लेक्टिव संकेतक, रोड मार्किंग, चेतावनी बोर्ड और आवश्यकता के अनुसार ट्रैफिक प्रबंधन इस जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हिमाचल में अत्यधिक ठंड केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। सर्दियों में कई मैदानी एवं मध्यवर्ती क्षेत्रों में भी तापमान में अचानक गिरावट और शीतलहर जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव बुजुर्गों, छोटे बच्चों, खुले में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, बेघर व्यक्तियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ सकता है।
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Thursday, October 1
