नाहन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) (एसपी जैरथ):-देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों ने अब हिमाचल के पहाड़ों, जंगलों और जलस्रोतों को बचाने की लड़ाई छेड़ दी है। उनका सवाल साफ है कि जब विकास और खनन के नाम पर पहाड़ों का सीना छलनी होगा, जलस्रोत प्रभावित होंगे और धार्मिक स्थलों से लेकर स्कूलों तक की सुरक्षा पर खतरा मंडराएगा, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा? इसी मुद्दे पर पहाड़ी समाज पर्यावरणी कवच फाउंडेशन और वसुंधरा संरक्षण समिति, संगड़ाह ने सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगते हुए संघर्ष तेज करने का ऐलान किया है। शुक्रवार को नाहन में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में पूर्व मेजर जनरल एवं पहाड़ी समाज पर्यावरणी कवच फाउंडेशन के संस्थापक अतुल कौशिक ने कहा कि संस्था विकास या खनन के विरोध में नहीं है, लेकिन विकास वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए। पहाड़ों की पर्यावरणीय क्षमता, स्थानीय आबादी की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों को नजरअंदाज कर किया गया विकास भविष्य के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। उन्होंने धार्मिक स्थलों पर पर्यावरणीय क्षमता से अधिक पर्यटकों की आवाजाही, अवैज्ञानिक खनन, पेड़ों की कटाई और प्रदूषण पर सवाल उठाए। 90 से अधिक आरटीआई, फिर भी जवाबदेही पर सवाल अतुल कौशिक ने आरोप लगाया कि पर्यावरण, खनन और जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में 90 से अधिक आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिले।
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- उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक
- पहाड़ों की कीमत पर विकास मंजूर नहीं, खनन में जवाबझदेही तय करे सरकार : पूर्व मेजर जनरल अतुल कौशिक
- रेणुकाजी के विधायक विनय कुमार ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर दिया जोर
- महिला आर्थिकी के साथ क्षेत्र के विकास को नई दिशा प्रदान करेंगी टमाटर प्रसंस्करण इकाइयां – डॉ. शांडिल
- नई तकनीक की जानकारी एवं कौशल उन्नयन बेहतर रोज़गार एवं स्वरोज़गार के लिए आवश्यक – डॉ. शांडिल
Friday, October 16
