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    Home»हिमाचल प्रदेश»आंगनवाड़ी मिड डे मील और निर्माण मजदूर उतरे सड़कों पर, किया जोरदार प्रदर्शन
    हिमाचल प्रदेश

    आंगनवाड़ी मिड डे मील और निर्माण मजदूर उतरे सड़कों पर, किया जोरदार प्रदर्शन

    By Himachal VartaNovember 27, 2020
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    नाहन (हिमाचलवार्ता)।  जिला सिरमौर के सभी खण्ड स्तर पर संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आहवाहन पर सीटू के बैनर तले सभी मजदूर वर्ग सड़कों पर उतरे। जिला सिरमौर में नाहन, शिलाई, पौंटासाहिब , संगड़ाह , पच्छाद में विरोध प्रदर्शन में सीटू के बैनर तले सैकड़ो आंगनबाड़ी वर्करज, हेल्परज और मिड डे मील वर्करज निर्माण मजदूरो और मनरेगा मजदूरों ने भाग लिया। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में पच्छाद में सीटू जिला कोषाध्यक्ष आशीष कुमार, आंगनवाड़ी वर्करज हेल्पेरज यूनियन की महासचिव वीना शर्मा, किरण बाला, श्यामा , सुनीता आदि ने भाग लिया। मिड डे मील से जिला कमेटी सदस्य नरेश शर्मा, राजगढ़ के अध्यक्ष विनीत खेमचंद आदि ने भाग लिया तथा सरकार से मजदूरों की निम्नलिखित मांगो पर नीति बनाने के लिए कहा।

    उन्होंने कहा कि 44 श्रम कानूनों को खत्म कर श्रम संहिताओं में बदलने के मजदूर विरोधी निर्णय को वापिस लिए जाए। किसान विरोधी कानून वापिस लिए जाएं। स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करो।वर्तमान जीवनयापन सूचकांक के आधार पर राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपए प्रतिमाह घोषित किया जाए। सरकारी कांट्रेक्ट, ठेकेदारी प्रथा व आऊटसोर्स प्रणाली को खत्म किया जाए और मजदूरों व कर्मचारियों को पक्का रोजगार दिया जाए। उच्चत्तम न्यायालय के फैसले के अनुसार समान काम का समान वेतन दिया जाए। सभी आऊटसोर्स कर्मियों को सरकारी अनुबंध पर लिया जाए।

    केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों को जल्दी भरने की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जा सके। बैंक, बीमा, बी.एस.एन.एल. पोस्टल, रक्षा, बिजली, रेलवे, कोयला, बन्दरगाहों, एन.टी.पी.सी., एस.जे.बी.एन.एल., बी.एच.ई.एल. (भेल). एन.एच.पी.सी, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सार्वजनिक क्षेत्रों का विनिवेश व निजीकरण बन्द किया जाए। केन्द्र सरकार महंगाई को रोकने के लिए तुरन्त कदम उठाए। डिपुओं में राशन व्यवस्था मजबूत की जाए। पेट्रोल व डीजल पर एक्साईज ड्यूटी व वैट कम किया जाए।

    सभी मजदूरों को पेन्शन सुविधा दी जाए। वर्ष 2003 के बाद नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को नई पेन्शन नीति (एन.पी.एस.) के बजाए पुरानी पेन्शन नीति (ओ.पी.एस.) के दायरे में लाया जाए। आंगनबाड़ी, मिड डे मील व आशा वर्करज़ को सरकारी कर्मचारी बनाया जाए तथा पेन्शन लाभ दिए जाएं। उन्हें हरियाणा की तर्ज पर वेतन दिया जाए। मोटर व्हीकल एक्ट में परिवहन मजदूर व मालिक विरोधी बदलाव वापिस लिए जाएं। मनरेगा मजदूरों को कम से कम 200 दिन का काम दिया जाए तथा उन्हें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन दिया जाए। मनरेगा व निर्माण मजदूरों का सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण सरल किया जाए। मनरेगा व निर्माण मजदूरों को 3 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाए।

    उनके सभी आर्थिक लाभों में बढ़ोतरी की जाए। स्ट्रीट वैन्डरज़ एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए। रेहड़ी-फड़ी-तयवजारी (स्ट्रीट वैन्डरज) के अधिकारों की रक्षा की जाए। सभी मजदूरों को भविष्य निधि, ई.एस.आई.. चिकित्सा लाभ, दुर्घटना, ग्रैच्युटी व पेन्शन लाभ आदि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। भविष्य निधि के पैसे को सट्टाबाजार में न लगाया जाए। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को कारखाना मालिकों द्वारा आवास सुविधा मुहैया करवाई जाए अन्यथा राज्य सरकार द्वारा मजदूरों के लिए आवासीय कॉलोनियों का निर्माण किया जाए।

    औद्योगिक मजदूरों को न्यूनतम वेतन अन्य मजदूरों से 40 प्रतिशत अधिक दिया जाए। यूनियनों का पंजीकरण सरल कर इसे एक महीने के अन्दर किया जाए। सेवाकाल के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को बिना शर्त करूणामूलक आधार पर नौकरी दी जाए। केन्द्र सरकार के सभी विभागों में महिला कर्मचारियों को दो वर्ष की चाईल्ड केयर लीव दी जाए। सेवारत सरकारी कर्मचारियों को 50 वर्ष की आयु व 33 वर्ष की नौकरी के बाद जबरन रिटायर करना बन्द किया जाए।

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