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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»बर्ड फ्लू को जिला में फैलने से रोकने के लिए जिलावासी बरतेें सतर्कता-डॉ0परूथी
    सिरमौर

    बर्ड फ्लू को जिला में फैलने से रोकने के लिए जिलावासी बरतेें सतर्कता-डॉ0परूथी

    By Himachal VartaJanuary 14, 2021
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    नाहन (हिमाचलवार्ता)। उपायुक्त सिरमौर डॉ0आर0के0परूथी ने आज उपायुक्त कार्यालय के बैठक कक्ष में बर्डफ्लू की आशंका के चलते गठित टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में बर्डफ्लू को जिला में फैलने से राकने के लिए तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।
    उपायुक्त ने बैठक में पुलिस विभाग को निर्दश देते हुए कि जिला में  बाहर से लाई जाने वाली पॉलट्री को जिला में प्रवेश न करने दें। उन्हांेने पशुपालन विभाग को जिला के मीट विक्रेताओं को कार्यशाला आयोजित कर बर्डफ्लू की गंभीरता के बारे में जागरूक करने के निर्देश जारी किए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि व अपनी तैयारियां पूर्ण रखे ताकि बर्डफ्लू  के फैलने की स्थिति में लोगों को आवश्यक उपचार उपलब्ध हो सके।
    उन्होंने मुर्गी व्यवसाइयों से अनुरोध किया है कि वह विभाग द्वारा चिहिन्त संस्थानों से ही मुर्गिया खरीदें क्योंकि इन चिहिन्त संस्थानों में समय-समय पर मुर्गियों में फैलने वाले रोगों की निगरानी की जाती है। उन्हांेने जिलावासियों से अपील की है कि जिला में  किसी भी स्थान पर मृत अवस्था मंे पाए जाने वाले पक्षियो को न छुए और इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें ताकि बर्डफ्लू को फैलने से रोका जा सके और पंख नुमा पक्षियों को ना खाने की  हिदायत भी दी।
    उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस (एच5एन1) की वजह से होता है। ये एक वायरल इंफेक्शन है जो संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले अन्य पक्षियों, जानवरों और इंसानों में फैलता है। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू नाम की बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाली पानी के संपर्क में आने से फैलती है। इसके अलावा संक्रमित जगहों को छूने, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों को बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। यह वायरस संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले जानवर और मनुष्यों में आसानी से फैल जाता है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि इससे मौत तक हो सकती है।
    उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू सेे बचाव के लिए हाथों को 15 सेकेंड तक धोएं या सैनिटाइज का इस्तेमाल करें। पोल्ट्री फार्म में काम करने के लिए डिस्पोजेबल ग्लव्स पहनें और इस्तेमाल के बाद इन्हें नष्ट कर दें। छींकने या खांसने से पहले मुंह को अच्छे से ढक लें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
    बैठक में उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ0नीरूशबनम ने  मुर्गियों को बर्डफ्लू से बचाने के लिए प्रारम्भिक रोकथाम व नियन्त्रण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हांेने बताया कि फार्म व बाड़े में जाने के लिए अलग कपड़ों तथा जूतों का इस्तेमाल करें। फार्म व बाड़े के बाहर फुटबाथ बनायें जिसमे फिनायल अथवा अन्य कीटाणुनाशक घोल का प्रयोग करें। फार्म व बाड़े में जाने से पहले व आने के बाद साबुन से हाथ धोएं। फार्म या बाड़े के चारों तरफ नियमित रूप से चूने का छिडकाव करें। फार्म व बाड़े में पड़े छिद्रों को बंद करें जिससे चूहे व नेवले अंदर प्रवेश न कर सकें। फार्म व बाड़े के चारों तरफ उगी ऊँची झाड़ियों व ऊँचे पेड़ों की टहनियों को काटें, जिससें कोवे, चील व गिद्ध जैसे मांसाहारी पक्षी उस पर न बैठे सकें।
    मुर्गी पालकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मांसाहारी व प्रवासी पक्षियों का मल किसी भी तरीके से फार्म मुर्गियों के संपर्क में न आये।में रखी घरेलु मुर्गी पालन या देसी मुर्गी पालने वाले किसानों की मुर्गियां भोजन की तलाश में अक्सर नाली व घर के पिछवाड़े में घूमती हैं, इसलिए इन किसानों को विशेष ध्यान देना चाहिए और एहतियात के तौर पर उनके दाने-पानी कि व्यवस्था बाड़े में उपलब्ध करनी चाहिए जिससे मुर्गियों को भोजन के लिए खुले में विचरण ना करना पड़े । ऐसा करने से उनका सम्पर्क मांसाहारी व प्रवासी पक्षियों के मल से नहीं रहेगा।
    डॉ0नीरू शबनम ने बताया कि जिलावासियों व जिन मुर्गी पलकों ने घर में कुत्ते पाल रखे हैं, वह उन्हें बांध के रखें और उनके भोजन की व्यवस्था उनकी जगह पर ही करें। ’ फार्म में आवारा कुत्ते न आयें इसलिए किसानों को फार्म के चारों तरफ बाड़-बंदी करनी चाहिए। मुर्गी फार्म से निकलने वाले कूड़े में अक्सर अनाज के दाने रहते हैं, इसलिए किसानों को कूड़े का उचित प्रबन्ध करना चाहिए जिससे पक्षी व चूहे उस तरफ आकर्षित न हों। मुर्गी फार्म में मृत पक्षियों के लिए अलग से गड्ढ़े कि व्यवस्था करनी चाहिए जिससे नेवले और आवारा कुत्ते व जंगली जानवर आकर्षित न हों। इन गड्ढों में पक्षियों को दबाने से पहले शवों के ऊपर नमक व चूने की एक परत फैलाएं।
    बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त प्रियंका वर्मा, बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए जिला नोडल अधिकारी सचिन बिन्द्रा सहित टास्क फोर्स के सदस्य भी मौजूद रहे।
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