नाहन (हिमाचलवार्ता)। जिला सिरमौर के प्रमुख शक्तिपीठ काली स्थान मंदिर के मुख्य महंत राजगुरु कृष्णनाथ की कोरोनावायरस से मौत हो गई है । रियासत कालीन परंपरा के अनुसार राजगुरु का दर्जा प्राप्त महंत कृष्णनाथ को आज सुबह 8:00 बजे संत समाज के द्वारा समाधि भी दी गई। बता दे कि राजगुरु कृष्ण नाथ हाल ही में 15 अप्रैल को हरिद्वार कुंभ स्नान के लिए गए थे। कुंभ मेले के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर वह नाहन लौट आए थे।
जिसके बाद नाहन के मेडिकल कॉलेज में उनका आरटी पीसीआर टेस्ट करवाया गया। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उन्हें साईं अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। बीते कल देर शाम को महंत कृष्णा नाथ ने अंतिम सांस लेते हुए दुनिया से विदाई ली। राजगुरु के पंचतत्व में विलीन होने के बाद पूरे जिला सिरमौर में शोक की लहर है।
महंत कृष्णनाथ 83 वर्ष की आयु के थे, करीब 40 वर्षों से वह नाहन के प्रमुख शक्तिपीठ काली स्थान मंदिर में बतौर मुख्य नियुक्त थे। मंदिर की तमाम प्रशासनिक व्यवस्थाएं द्वितीय राजगुरु स्वामी तीर्थ आनंद महाराज देख रहे थे। नाथ संप्रदाय से ताल्लुक रखने वाले महंत राजगुरु को समाधि देने के दौरान हरियाणा उत्तराखंड दिल्ली सहित हिमाचल के प्रमुख संत समुदाय ने अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराई। राजगुरु को काली स्थान मंदिर में ही समाधि दी गई है।
हालांकि प्रशासन के द्वारा पहले से ही मंदिरों को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं लिहाजा राजगुरु का अंतिम संस्कार भी कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया। इस दौरान हरियाणा, अंबाला से संत मनसा नाथ, पाल नाथ विश्वनाथ यह महाराज के शिष्य भी थे और दिल्ली से संस्कार में शामिल हुए। कुरुक्षेत्र से संत सुमेर नाथ आदि समाधि दिए जाने के दौरान नाथ परंपरा संस्कार निभाने पहुंचे थे।
द्वितीय राजगुरु महंत तीर्थ आनंद ने अपने गुरु के देहांत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहां कि उनके मार्गदर्शन में सनातन धर्म ने काफी प्रसिद्धि भी पाई है। उन्होंने कहा कि राजगुरु कृष्ण नाथ दयालु और पहुंचे हुए विद्वान पुरुष थे। उनके सामाजिक सरोकार भी काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों की सहायता करना और असहाय युवतियों की शादियां अपने खर्चे पर करवाने के लिए उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
