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    हिमाचल प्रदेश

    राष्ट्रीय राजमार्ग 707 पर कार्य कर रही कंपनियों को वन विभाग की तरफ से बड़ा झटका

    By Himachal VartaSeptember 17, 2021
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    नाहन (हिमाचलवार्ता)। राष्ट्रीय राजमार्ग 707 पर कार्य कर रही कंपनियों को वन विभाग की तरफ से बड़ा झटका लगा है, वन विभाग ने सडक बना रही कम्पनियों को लेंड स्टेबलाइजेशन कार्य करने के लिए सतोंन व मिनस में वन भूमि पर स्वीकृतियां दी हुई थी, लेकिन वर्तमान में वन विभाग ने अपने आदेशों पर रोक लगाकर कंपनियों द्वारा किए गए बेतरतीव कार्यों पर जांच बिठाई है, जिसके कारण एनएचएआई, सड़क निर्माण कम्पनियां व प्रशासनिक अम्ला में हडकम्प मचा हुआ है।

    राष्ट्रीय राजमार्ग 707 पर सतोंन व मिनस में एबीसीआई व डीसी कम्पनी को वन विभाग ने लगभग 4 माह पूर्व लैंड स्टेबलाइजेशन कार्य के लिए निर्धारित जगह का चयन किया था, जिसमें पेड़ों सहित औषधीय पोधे लगाने का ग्रीन कार्यक्रम था, लेकिन सम्बन्धित कम्पनियों ने लैंड स्टेबलाइजेशन वाले एरिया को डंपिंगयार्ड में तब्दील कर दिए है, बेतरतीव तरीके से कम्पनियों ने करोड़ों मीट्रिक टन मलबा वन परिक्षेत्र में डाल दिया है, नए पेड़ लगाना तो दूर लेकिन पहले लगे पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है, कम्पनियों की मनमानी व एनएचएआई की अनदेखी के कारण वन विभाग हरकत में आया है, और सख्त कार्यवाही करने के मूड में नजर आ रहा है।

    यदि एबीसीआई कम्पनी की बात करें, तो कम्पनी ने करोड़ों मीट्रिक टन मलबा वन परिक्षेत्र में डाल दिया है, मलबे को रोकने के लिए वायरक्रेट में घटिया क्वालिटी की वायर का इस्तेमाल किया है, सुरक्षा दीवारों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, कार्य कर रहे मजदूरों को निर्धारित रेट से 80 प्रतिशत कम दर पर मजदूरी दी गई है, इतना ही नहीं बल्कि कम्पनी से इस बारे बात की जाए, तो कम्पनी सीधे तौर पर कहती है, कि कम्पनी की जगह एनएचएआई से बात करें, इस बात पर कितने सवाल खड़े उठते है, यह बात सबके समझ में आ रही है, यही बड़ा कारण है, कि मौका पर हुए कार्य में गुणवत्ता नहीं आ पाई है, ऐसे ही हालात अन्य जगह बने हुए है।

    क्षेत्रीय लोगो की माने तो एनएचएआई सहित प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की सूचनाएं है, वन विभाग ने लैंड स्टेबलाइजेशन की परमिशन टेबल के नीचे से सम्बन्धित कम्पनियों को इसलिए दी, ताकि जनता के सामने डंपिंगयार्ड के लिए अनोपचारिक तरीके से दी गई परमिशन का खुलासा न हो सकें, जब मीडिया ने अधिकारियों सहित कम्पनियों की करनी व कथनी जनता के सामने रखी, तो लैंड स्टेबलाइजेशन की परमिशन सामने आई है, जिसपर वन विभाग ने रोक लगाकर मामले में जांच के आदेश जारी किए है, क्षेत्रीय लोगो ने बताया कि यदि वन विभाग मामले में लापरवाही करता है, तो भ्रष्ट अधिकारियों सहित एनएचएआई के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि अखण्ड भारत ने राष्ट्रीय राजमार्ग 707 पर सड़क निर्माण कर रही कम्पनियों की मनमानी व बेतरतीव मलबा फैकने के मामले को प्रमुखता से उठाया है, कम्पनियों की बेतरतीवी को जनता व प्रशासन के सामने रखने की भरपूर कोशिश की, बेतरतीव मलबे से किसानों, बागवानों व जनता को होने वाले नुकसान सहित समस्याओं को प्रमुखता से प्रदेश व केंद्र सरकार के समक्ष रखने के प्रयास किए गए, इस दौरान शासन, प्रशासन व मतलब परस्त लोगो के धमकियों भरे फोन व दबाव की स्तिथि कई बार सामने आई, बावजूद उसके निष्पक्ष व निडरता के साथ मामले को उठाते रहे, उच्चधिकारियों सहित सरकार के समक्ष मामला पहुंचने के बाद वन विभाग ने तत्कालीन डीएफओ का तबादला रेणुका जी से सोलन कर दिया, जिसके कारण कुछ दिनो तक मामला ठन्डे बस्ते में पड़ा रहा, लेकिन अब वन विभाग की कार्यवाही से कम्पनियों को कई लाखो का जुर्माना लगने के आसार नजर आ रहे है।

    वन परिक्षेत्र रेणुका जी में कार्यरत डीएफओ सुशील राणा ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 707 पर सड़क निर्माण कर रही कम्पनियों द्वारा किए जा रहे लैंड स्टेबलाइजेशन कार्यों को रोक दिया गया है, कम्पनियों ने बेतरतीव कार्य किए है, जिससे वन भूमि सहित बंस्पनियों को नुकसान हुआ है, मौका पर निर्धारित जगह से अधिक मलबा फेंका गया है, जिसमें अभी तक नाममात्र का जुर्माना किया गया है, मामले में जांच बिठाई जा रही है तथा मौका की स्थिति व डंप हुए मलबे को नापने के बाद आगे की स्तिथि स्पशट की जाएगी।

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