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    Home»हिमाचल प्रदेश»कम्पनी ने वन विभाग के बगैर अनुमति के दर्जनों हरे पेड़ किए धराशाही
    हिमाचल प्रदेश

    कम्पनी ने वन विभाग के बगैर अनुमति के दर्जनों हरे पेड़ किए धराशाही

    By Himachal VartaSeptember 26, 2021
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    कम्पनी ने वन विभाग के बगैर अनुमति के दर्जनों हरे पेड़ किए धराशाही 
    नाहन (हिमाचलवार्ता)। शिलाई नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य कर रही एबीसीआई कम्पनी की मनमानी जारी है। कम्पनी ने वन विभाग के बगैर अनुमति के दर्जनों हरे पेड़ धराशाही कर दिये है।

    लेकिन वन विभाग के अधिकारी कम्पनी पर कारवाई करने से कत्तरा रहे है। जिससे वन विभाग की कारवाई पर कई सवारिया निशान खड़े हो रहे है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार पांवटा साहिब-शिलाई गुम्मा नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य के लिए केंद्र सरकार ने 1350 करोड़ रूपये जारी किये है। जिसका 4 भागों में टेंडर लगा हुआ है।

    पांवटा साहिब से सतौन तक 25 किलोमीटर का निर्माण कार्य एबीसीआई कम्पनी को मिला है। जिसका निर्माण कार्य कम्पनी ने शुरू किया है।

    पांवटा साहिब से सतौन पुल तक करीब 850 पेड़ों के कटाने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दी थी। जिसके बाद वन विभाग ने कॉर्पोरेशन के माध्यम से 850 पेड़ों का कटान किया था तथा एबीसीआई कम्पनी ने सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया है।

    लेकिन एबीसीआई कंपनी ने दर्जनों हरे पेड़ों को मशीन से खुदाई के समय गिरा दिये है। जिसकी अनुमति वन विभाग से नहीं ली गई है।

    बताया जा रहा है की पहलें राजबन से कच्ची ढांंग तक एबीसीआई कंपनी ने करीब 4 दर्जन पेड़ों को खुदाई के दौरान एक महीने पहलें गिरा दिये थे।

    जिसके बाद वन विभाग ने इसकी डेमेज रिपोर्ट तैयार की वन विभाग ने कम्पनी पर मात्र एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया जबकी इसकी किमत करीब 5 से 7 लाख रूपये की बताई जा रही है।

    पांवटा साहिब क्षेत्र में दो दिन तक तेज बारिश हुई। इस दौरान एबीसीआई कम्पनी ने राजबन व सिरमौर के बीच में मशीनों से सड़क की खुदाई की है। जिससे करीब एक दर्जन से अधिक पेड़ फिर से गिरा दिये है।

    सिरमौर के पास तो कंपनी ने रातों रात सड़क से पेड़ों को गायब करवा दिये है और कुछ पेड़ों को मशीनों से सड़क की निचली तरफ फैंक दिये है। लेकिन वन विभाग इस पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रहे है।

    जिससे कम्पनी की मनमानी जारी है तथा कई पेड़ों को गिरा चुके है। जिससे वन विभाग के कार्यप्रणाली पर भी कई सवालियां निशान खड़े हो गये है।

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