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    सिरमौर

    75 करोड़ की क्वालिटी ऑफ पावर योजना ट्रांसमिशन को लेकर संकट में

    By Himachal VartaApril 30, 2022
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    नाहन 30 अप्रैल (एसपी जैरथ) 🙁 हिमाचल वार्ता न्यूज) जिला सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र व आम लोगों के लिए निर्बाध व गुणवत्ता वाली बिजली उपलब्ध कराने को लेकर 220 केवी का पावर स्टेशन तैयार किया जा रहा है। 75 करोड़ से अधिक की राशि से बनने वाले इस पावर सबस्टेशन के रास्ते में ट्रांसमिशन को लेकर बड़ी बाधा खड़ी हो गई है। पावर स्टेशन से बिछाई जाने वाली ट्रांसमिशन लाइन पर स्थानीय लोगों ने जमीन देने से मना कर दिया है। लोगों का कहना है कि उनके पास पहले ही उपजाऊ जमीन का अभाव है। ऐसे में ट्रांसमिशन लाइन के लिए जमीन दिए जाने के बाद उनके कृषि संबंधी कार्य पूरी तरह से बाधित हो जाएंगे।

    तो वही स्थानीय विधायक राजीव बिंदल व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने भी आम लोगों की समस्या को प्राथमिकता दी है। दोनों प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को अब ट्रांसमिशन रूट बदलने के लिए आदेश भी दे दिए हैं। यही नहीं ट्रांसमिशन रूट बदले जाने को लेकर कॉरपोरेशन के आगे फॉरेस्ट क्लीयरेंस की भी समस्या खड़ी हो जाएगी। जिसके चलते यह बहुउद्देशीय परियोजना जहां जनवरी 2023 में लोकार्पण होनी थी वह लटक गई है। हालांकि ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को जल्द से जल्द नई ट्रांसमिशन लाइन की रिपोर्ट बनाने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। बावजूद इसके फॉरेस्ट क्लीयरेंस समय पर हो पाएगी या नहीं इसको लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता।

    गौरतलब हो कि प्रदेश सरकार ने उद्योगों व स्थानीय लोगों को क्वालिटी ऑफ पावर इंप्रूवमेंट किए जाने को लेकर 220 किलो वाट के सब स्टेशन बनाए जाने को लेकर मंजूरी दी थी। जिसमें 75 करोड रुपए पावर स्टेशन के लिए जबकि ट्रांसमिशन हेतु 39 करोड रुपए मंजूर किए हुए हैं। बता दें कि इस बहुउद्देशीय योजना को लेकर अपस्ट्रीम में 17 हेक्टेयर जबकि डाउनस्ट्रीम में 3.6 हेक्टेयर जमीन एक्वायर की जानी है। एचपीपीटीसीएल के मैनेजर रणधीर ठाकुर का कहना है कि ट्रांसमिशन लाइन हेतु पहले किया गया सर्वे कंप्लीट था। उन्होंने कहा कि अब लोगों ने टावर लगाने के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया है। बड़ी बात तो यह है कि सरकार यदि चाहे तो इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत जमीन एक्वायर कर सकती है।

    मगर स्थानीय विधायक लोगों की उपजाऊ जमीन को एक वायर किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों के साथ खड़े हो गए हैं। ऐसे में जहां यह योजना जनवरी 2023 में तैयार हो जानी थी अब इसमें समय लग सकता है। वही विधायक डॉ राजीव बिंदल ने कहा है कि स्थानीय लोगों के पास कृषि के लिए पहले ही उपजाऊ जमीन का अभाव है। उन्होंने कहा ऐसे में उपजाऊ जमीन के स्क्वायर होने के बाद लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा पावर स्टेशन की ट्रांसमिशन लाइन के लिए अन्य विकल्प तलाशने के लिए अधिकारियों को कह दिया गया है।

    उधर, ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने कहा कि जल्द ही अन्य विकल्प तलाश करते हुए ट्रांसमिशन लाइन का सर्वे किया जाएगा। फॉरेस्ट क्लीयरेंस जल्दी हो इसके लिए भी सरकार की प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के पूर्ण होने के बाद औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों को निर्बाध रूप से पूरी-पूरी बिजली मिलेगी तो वही लोगों को भी बेहतर बिजली उपलब्ध होगी।

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