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    Home»हिमाचल प्रदेश»भारत को विश्व का अग्रणी देश बनाने के लिए प्रशिक्षित व प्रतिभा सम्पन्न मानव संसाधन की आवश्यकताः मुख्यमंत्री
    हिमाचल प्रदेश

    भारत को विश्व का अग्रणी देश बनाने के लिए प्रशिक्षित व प्रतिभा सम्पन्न मानव संसाधन की आवश्यकताः मुख्यमंत्री

    By Himachal VartaJanuary 3, 2020
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    शिमला। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि भारत को विश्व का अग्रणी देश बनाने और आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिए प्रतिभा सम्पन्न और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता है तथा इसमें शिक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है। वह आज यहां राजकीय महाविद्यालय चैड़ा मैदान में हिमाचल प्रदेश महाविद्यालय शिक्षक संघ द्वारा ‘राष्ट्र निर्माण के लिए उच्च शिक्षा’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को विश्व स्तरीय अध्ययन पद्धतियों की सुविधा प्रदान करने के प्रयास होने चाहिए तथा उनकी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ-साथ उन्हें रोजगार प्रदान करने की चुनौती का भी सामना करने की आवश्यकता है। आज के दौर में डिजिटल प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग करने की आवश्यकता है क्यांेकि तकनीक के अधिकाधिक प्रयोग से विद्यार्थियों को समय, पहुंच और स्थान की सीमाओं से छूट मिलती है। तकनीक के कारण शिक्षा अधिक लचीली, सुलभ और व्यक्तिगत बन गई है।
    जय राम ठाकुर ने कहा कि अच्छी शिक्षा प्रणाली से विद्यार्थी का मस्तिष्क प्रगति, राष्ट्रवाद और सामाजिक विकास की ओर मुड़ता है। विद्यार्थियों को अपने स्तर पर सोचने, विश्लेषण करने, तर्क देने, प्रतिक्रिया करने और अपने निष्कर्ष के लिए छूट दी जानी चाहिए।
    उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल के दौरान कई छोटे-छोटे निर्णय कार्यान्वित किए गए है जिनका आम जनता के जीवन पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जन मंच, पैंशन योजना, हिम केयर, सहारा योजना और गृहिणी सुविधा योजना आदि से प्रदेश के लाखों लोग लाभान्वित हुए हैं।
    जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां जनसंख्या अनुपात में कर्मचारी सर्वाधिक हैं। प्रदेश सरकार निजी क्षेत्र के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के प्रयास कर रही है। एक प्रतिष्ठित पत्रिका के सर्वेक्षण में हिमाचल प्रदेश को देश में स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्रों में प्रथम स्थान पर आंका गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा रोजगारपरक हो और युवाओं को इस योग्य बनाए कि वे दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर सके।
    उन्होंने आश्वासन दिया कि आज के सम्मेलन में शिक्षकों ने जो मुद्दे उठाए हैं, सरकार उन पर विचार करेगी। एमफिल और पीएचडी करने वालों को वेतन वृद्धि बहाल करने और यूजीसी के मापदण्डों के अनुरूप महाविद्यालयों में प्रोफेसर का पद सृजित करने सम्बन्धी प्रवक्ताओं की मांग पर सरकार विचार करेगी। इसके अतिरिक्त, विभागीय परीक्षाओं से छूट देने सम्बन्धी मांग पर भी विचार किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सेन्टर आॅफ एक्सीलेंस शिमला में अर्थशास्त्र के एसोशिएट प्रोफेसर डाॅ. जीपी कपूर की पुस्तक ‘मिलेनियम एजुकेशन फोर नेशन बिल्डिंग’ तथा आयोजकों द्वारा तैयार की गई स्मारिका का विमोचन किया।
    शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य समाज की भलाई के लिए ज्ञान अर्जित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में कुछ राष्ट्र विरोधी तत्व उभर रहे हैं और यह आवश्यक है कि उन्हें शैक्षणिक संस्थानों का अनुचित इस्तेमाल करने से रोका जाए। उन्होंने शिक्षकों का आहवान किया कि अपने विद्यार्थियों में राष्ट्रवाद की भावना उत्पन्न करने के लिए वे विशेष प्रयास करें।
    अखिल भारतीय शिक्षक संघ की अध्यक्ष जगदीश प्रसाद सिंघल ने कहा कि शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण और विश्व गुरू का वैभव पुनः प्राप्त करने के लिए आगे आना चाहिए। शिक्षा का ध्येय चरित्र निर्माण होना चाहिए तभी यह राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत किसी समय शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख केन्द्र हुआ करता था लेकिन विदेश आक्रमणों के कारण देश ने इस गौरव को खो दिया। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की अपने-अपने विषयों पर गहरी पकड़ और विचारों की स्पष्टता होनी चाहिए।
    राष्ट्रीय संगठन सचिव महेन्द्र कपूर ने कहा कि संगठन देश के 25 राज्यों तक फैला है।
    महाविद्यालय शिक्षक संघ के राज्य प्रांत प्रमुख रविन्द्र ठाकुर ने मुख्यमंत्री व अन्यों का स्वागत किया।
    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य प्रोफेसर नागेश और पूर्व कुलपति सुनील गुप्ता भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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