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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»नाहन मेडिकल में भेड़-बकरियों की तरह वार्ड में रखा गया हैं प्रसूति महिलाओं को।
    सिरमौर

    नाहन मेडिकल में भेड़-बकरियों की तरह वार्ड में रखा गया हैं प्रसूति महिलाओं को।

    By Himachal VartaJuly 6, 2022
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    नाहन 06 जुलाई (हिमाचल वार्ता न्यूज):-एक तरफ तो प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मरीजों में हो रही बढ़ोतरी फिर से चिंता का विषय बन गई है और कोरोना के नए-नए वेरिएंट भी स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। दूसरी और डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रोगियों को भेड़ बकरी के तरह रखा गया है। या यूँ कहे की डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सफेद हाथी साबित हो रहा है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
    डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पांच वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जिला मुख्यालय नाहन में मेडिकल कॉलेज तो खोल दिया है लेकिन मेडिकल कॉलेज खोलने के 5 वर्षों बाद भी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं हो पाया है। आलम यह है कि अस्पताल में अच्छा खासा व्यक्ति भी बीमार हो जाता है। 
    इन दिनों  डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल  में स्थिति यह है कि एक एक बेड पर दो-दो मरीज नहीं बल्कि एक बेड पर 3 से 4 रोगी रखे गए है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यदि देखा जाए तो प्रसूति महिला जच्चा बच्चा सहित पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए और इन्फेक्शन से दूर रखने के लिए उसे अलग रखा जाता है लेकिन मेडिकल कॉलेज में अलग बेड मिलना तो दूर यहां प्रसूति महिलाओं को जच्चा बच्चा सहित क़्वारंटीन वार्ड में एक बेड पर दो-दो महिलाओं को भर्ती किया गया है।
    मजेदार बात तो यह है कि महिलाओं के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा  अलग से कोरेंटिन वार्ड  बनाया गया है। यदि इस   क़्वारंटीन वार्ड में जच्चा बच्चा के काउंटिंग की जाए तो सात बेड पर 28 को रखा गया है। एक तरफ तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रसूति महिला में जच्चा बच्चा सहित बहुत जल्दी इंफेक्शन की चपेट में आ सकते है जिसके चलते एहतियात बरतना पड़ता है।
    लेकिन डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन को ना तो इन्फेक्शन का डर है और ना ही इस बात की कोई परवाह है कि यदि कोई जच्चा बच्चा किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाता है तो उसकी जान भी जा सकती है। मजेदार बात तो यह है कि हिमाचल प्रदेश में अभी कोरोना गया नहीं है और पिछले एक महीने से कोरोना के मामले बढ़कर 650 पहुंच गए है। बावजूद इसके भी एक बेड पर चार-चार लोगों को रखा जा रहा है। 
     एक बेड पर जच्चा बच्चा सहित चार लोग कैसे रहेंगे , यह तो वह महिलाएं ही बता सकती है जो अपने नवजात शिशु के साथ इस  कोरेंटिन वार्ड  में रह रही है। हैरत की बात तो यह है कि जिस क़्वारंटीन वार्ड में महिलाओं को रखा गया है वहां पर किसी भी किस्म की और सुविधा उपलब्ध नहीं है।
    तीमारदारों को बरामदे में रात काटनी पड़ रही है। इस बारे में डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. बलराम धीमान से बात की तो उन्होंने कहा की अधिक रोगी होने के चलते एक बेड पर दो दो को भर्ती करना पड़ रहा है।
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