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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»सैलानियों के लिए हेवन से कम नहीं राजगढ़ का हाब्बन एरिया
    सिरमौर

    सैलानियों के लिए हेवन से कम नहीं राजगढ़ का हाब्बन एरिया

    By Himachal VartaJuly 28, 2022
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    नाहन(हिमाचल वार्ता न्यूज) :-  समुद्र तल से करीब 6770 फुट की ऊंचाई पर स्थित देवदार के सुन्दर वन के मध्य बसा है राजगढ़ का  सुदंर गांव हाब्बन । इस स्थल की नैसर्गिक छटा को देखते हुए इसे प्रकृति का हेवन भी कहा जाता है। यह रमणीक स्थल पर्यटन की अपार संभवानाओं को समेटे हुए हैं । परंतु इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए किसी भी सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई है । बता दें कि हाब्बन  प्रदेश केे प्रसिद्ध पर्यटन गंतब्य ंकी तरह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर  अपनी एक अलग पहचान बना सकता है । जिससे  चिन्हित पर्यटक स्थलों शिमला, कूफरी, नारकंडा, चायल, कसौली पर पर्यटकों का दबाव कम हो सकता है  ।
    हालांकि हाब्बन मंे पर्यटकों की सुविधा के लिए वन विभाग का एक सुंदर विश्राम गृह  है जिसमें पांच सेट बनाए गए है ताकि पर्यटक यहां आकर प्रकृति की प्रदूषणमुक्त अनुपम छटा का भरपूर आन्नद भी ले सके । बता दें कि  इस विश्राम गृह की  बुकिंग पर्यटन विभाग द्वारा की जाती है । करीब पांच वर्ष पहले यह विश्राम गृह पर्यटन विभाग को स्थानांतरित किया गया था परंतु इस अवधि में इस रेस्ट हाॅऊस में  पर्यटकों की आमदरफ्त काफी कम रही है । जिससे प्रतीत होता है कि आईटी के युग में इस स्थल के महत्व बारे   व्यापक प्रचार नहीं हो पाया है । इस  स्थल की सड़क के माध्यम दूरी सोलन से 70 किमी और राजगढ़ से केवल 30 किलोमीटर है ।
    पझौता स्वतंत्रता सैनानी परिवार समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश चैहान और पूर्व जिप सदस्य शकुंतला प्रकाश  ने बताया कि प्रदेश के पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा हाब्बन की नैसर्गिक सौंदर्य को देखते हुए पर्यटन का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए सरकार को निर्देश दिए गए थे परंतु उनके स्थान्नांतरित होने पर यह योजना फाईल में दफन होकर रह गई है । इनका कहना है कि हाब्बन से शिमला, कूफरी, चायल इत्यादि के अतिरिक्त हिमालय की हिमाच्छादित पर्वत श्रंृखलाओं का शोभनीय  नजारा देखने को मिलता है । हाब्बन में अतीत से स्थित काली का प्राचीन मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था व श्रद्धा का केंद्र रहा है जोकि पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन सकता है।  वन विभाग के रेस्ट हाॅऊस के समीप शहीद स्मारक भी है । चैहान ने बताया कि वनों से घिरे होने पर यहां पर वन्य जीव-जंतु भी देखने को मिलते हैं।  बताया कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ से पर्यटकों का कभी कभार आना शुरू हो गया है । कहा कि हाब्बन में अभी सुविधाओं का काफी अभाव है पर्यटकों के अधिक संख्या में आने से उन्हें ठहरने की असुविधा रहती है । इनका यह भी कहना है कि पर्यटकों के आने से गंदगी एवं विशेषकर प्लास्टिक का अंबार हो जाता है जिसके लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा । पर्यटन की दृष्टि से विकसित होने पर स्थानीय लोगों स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे ।
    वन परिक्षेत्र अधिकारी हाब्बन ने बताया कि इस स्थल को ईको -टूरिज्म के रूप में विकसित करने की सरकार की योजना है । उन्होने बताया कि वन विभाग द्वारा हाब्बन से बनालीधार तक रोड़ बना दिया गया है ताकि देश विदेश से पर्यटक आकर हाब्बन के आसपास के दर्शनीय स्थलों का भी आन्नद ले सके ।

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