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    हिमाचल प्रदेश

    सामाजिक दूरी बनाने के लिए हिमाचल के विचाराधीन कैदियों को मिलगी अस्थाई जमानत

    By Himachal VartaMarch 30, 2020
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    शिमला। प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि जेलों में कोविड-19 का संक्रमण रोकने के लिए भारत के सर्वाेच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनुपालना करते हुए हिमाचल प्रदेश विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चैहान की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने प्रदेश की जेलों में कैद विचाराधीन कैदियों को अधिकतम तीन महीनें की अस्थाई जमानत पर रिहा करने का निर्णय लिया गया है।

    समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि यह जमानत केवल हिमाचल प्रदेश के विचाराधीन कैदियों को ही दी जाएगी जो सात साल से कम का मुकदमा भुगत रहे हैं, पिछले तीन महीनों अथवा इससे अधिक अवधि से जेल में हैं और पहली बार अपराध में शामिल हुए हैं।

    विचारधीन कैदियों को अस्थाई जमानत का निर्णय कोविड-19 का संक्रमण रोकने और सामाजिक दूरी सुनिश्चित बनाने के लिए लिया गया है।

    उन्होंने कहा कि जिला दण्डाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक जमानत पर छूटने वाले कैदियों को उनके घरों तक पहुंचाने का प्रबन्ध करेंगे। इन कैदियों को जेल अधिकारियों द्वारा उचित स्वास्थ्य जांच के उपरान्त ही जमानत पर छोड़ा जाएगा।

    प्रवक्ता ने कहा कि न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों में भीड़ कम करने के उद्द्ेश्य से अस्थाई जमानत के लिए प्रार्थना-पत्र आॅनलाईन द्वारा भी भरे जा सकते हैं। देश भर में जारी लाॅकडाउन की स्थिति में विदेशी और बाहरी राज्यों के कैदियों को अस्थाई जमानत पर छोड़ने पर विचार नहीं किया जाएगा।

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन्हें सात साल तक की सजा हुई है, उन पात्र अपराधियों को पैरोल अथवा फरलो पर भेजने के लिए सक्षम प्राधिकरण उनके प्रार्थना पत्रों पर त्वरित कार्रवाई करेगा। सक्षम प्राधिकरण सीआरपीसी की धारा 432 के तहत अपराधियों की रिहाई के मामलों पर भी शीघ्रता से कार्रवाई करेगा।

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