मंडी ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ) एनजीटी के मुताबिक नदी, खड्ड और नालों से 25 मीटर की दूरी पर ही निर्माण किया जा सकता है। मंडी में ब्यास किनारे इन नियमों का पालन नहीं हुआ है। नदी के किनारों पर अधिकतर मकान एक्ट बनने से पहले निर्मित हो चुके थे। बाद भी में नियमों को दरकिनार कर नदी और खड्डों के किनारे कई मकान अवैध रूप से बनाए गए। अब जब ब्यास ने रौद्र रूप दिखाया तो ये निर्माण या तो बह गए हैं या फिर इस तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं कि नुकसान की पूर्ति होना कठिन है। नदी और खड्डों में निर्माण को लेकर जुलाई 2016 में एक्ट लागू हुआ। इससे पहले से ही बहुत सा निर्माण हो चुका था। बाद में भी कई लोगों ने जबरदस्ती निर्माण किए। इसका नतीजा अब भुगतना पड़ा है। मंडी में अधिकतर निर्माण कार्य से संबंधित क्षेत्र नगर निगम के पास हैं, जबकि कुछ क्षेत्र टाउन एंड कट्री प्लानिंग के पास है। नगर निगम का कहना है कि नए निर्माण कार्य के लिए नियम के तहत ही अनुमति और एनओसी दी जाती है। पहले हो चुके निर्माण के बारे में वे क्या कह सकते हैं। टाउन एंड कंट्री के अधिकारियों का कहना है कि वे नियम के तहत ही निर्माण की अनुमति देते हैं।
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Monday, October 5
