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    Home»हिमाचल प्रदेश»ऊना»ऊना में ‘मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना’ से सैकड़ों निराश्रित बच्चों को मिला नया जीवनाधार
    ऊना

    ऊना में ‘मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना’ से सैकड़ों निराश्रित बच्चों को मिला नया जीवनाधार

    By Himachal VartaNovember 22, 2025
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    ऊना ( हिमाचल वार्ता न्यूज़ ):-      ऊना जिले में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना सैकड़ों अभिभावक-विहीन और असहाय बच्चों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है। बीते दो वर्षों में योजना के विभिन्न प्रावधानों के तहत 3 करोड़ 63 लाख रुपये से अधिक की सहायता जारी की गई है, जिसने निराश्रित बच्चों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार दिया है।
    मिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन का संबल
    जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) नरेंद्र कुमार बताते हैं कि योजना ने बच्चों के लिए सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन, तीनों ही क्षेत्रों में ठोस परिणाम दिए हैं। सामाजिक सुरक्षा मद में 294 बच्चों को 2 करोड़ 27 लाख 56 हजार 628 रुपये प्रदान किए गए, जिससे उन बच्चों के जीवन में बुनियादी स्थिरता आई है जो पहले किसी प्रकार के सहारे से वंचित थे। उच्च शिक्षा के लिए 60 छात्रों को 26 लाख 44 हजार 814 रुपये और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 35 युवाओं को 7 लाख 99 हजार 471 रुपये उपलब्ध कराए गए। कोचिंग सहायता के अंतर्गत 2 विद्यार्थियों को 1 लाख 48 हजार रुपये, स्किल डेवलपमेंट के लिए एक युवक को 98 हजार रुपये और माइक्रो एंटरप्राइज शुरू करने हेतु 9 युवाओं को 13 लाख 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई।
    नरेंद्र कुमार कहते हैं कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच के अनुरूप विभाग का प्रयास केवल बच्चों को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे जीवन में किसी भी अवसर से वंचित न रहें।
    सामाजिक सहायता से मिला व्यापक सहारा
    जिला कार्यक्रम अधिकारी बताते हैं कि योजना के सामाजिक घटकों के अंतर्गत विवाह अनुदान में 25 लाभार्थियों को 50 लाख रुपये और आवास निर्माण के लिए 23 परिवारों को 34 लाख रुपये दिए गए। इसके अलावा वस्त्र भत्ता, त्योहार भत्ता और आफ्टर-केयर सेवाओं के अंतर्गत 28 लाभार्थियों को 1 लाख 84 हजार 988 रुपये प्रदान किए गए, जिससे बच्चों और युवाओं की बुनियादी जरूरतें सम्मानपूर्वक पूरी हो सकीं।
    सुक्खू सरकार निभा रही असल अभिभावक की भूमिका
    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि जिन बच्चों के माता-पिता उनका साथ छोड़ चुके हैं या जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, उनके लिए राज्य सरकार ही माता और पिता की भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार केवल उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभा रही, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, वस्त्र, कोचिंग और आवास जैसी वे सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, जो सामान्यतः एक परिवार अपने बच्चों को देता है।
    मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को 4000 रुपये मासिक पॉकेट मनी, कपड़ों का भत्ता और त्योहार भत्ता प्रदान किया जा रहा है। योग्य बच्चों को नामी शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पात्र लाभार्थियों को 3 बिस्वा भूमि और 3 लाख रुपये तक की सहायता से अपना घर बनाने का अवसर दिया जा रहा है।
    हिमाचल प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है जिसने अनाथ बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का कानूनी दर्जा दिया है और सरकार उनकी 27 वर्ष की आयु तक संपूर्ण देखभाल की जिम्मेदारी निभा रही है।
    योजना का दायरा हुआ और व्यापक
    मुख्यमंत्री ने हाल ही में योजना का दायरा बढ़ाते हुए ट्रांसजेंडर समुदाय, परित्यक्त या सरेंडर किए गए बच्चों और एकल नारियों को भी इसमें शामिल किया है। एकल नारियों के लिए 2500 रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे उन्हें स्थायी आर्थिक सहारा मिल सके।
    प्रशासन हर पात्र बच्चे को योजना का लाभ देने को प्रतिबद्ध
    उपायुक्त ऊना जतिन लाल का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन पारदर्शिता, त्वरित सहायता और विभागीय समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना से वंचित न रहे।
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