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    सिरमौर

    मकर संक्रांति पर राजगढ़ क्षेत्र में पहाड़ी व्यंजनों की महक

    By Himachal VartaJanuary 14, 2026
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    नाहन   ( हिमाचल वार्ता न्यूज)  मकर सक्रांति का तीन दिवसीय  पर्व समूचे राजगढ़ ़़ क्षेत्र में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । लोगों ने अपने घरों में सर्दी की ठिठुरती ठंड में पांरपरिक पहाड़ी व्यंजन  बनाकर खूब चटकारे लिए गए । इसके अलावा राजगढ़  के मंदिरों विशेषकर शाया मंें स्थित शिरगुल देवता के प्राचीन मंदिर  में काफी भीड़ देखी गई   । बता दें कि माघी पर्व पर राजगढ़ क्षेत्र में लोहड़ी पर आंगन में अलाव जलाकर तिल की रेवड़ी गजक, मूंगफली से अग्नि पूजा करने की कोई परंपरा नहीं है । इस पर्व पर दुल्ला भटटी और सुंदरी मुंदरी की गाथा नहीं गाई जाती है और न ही बच्चे लोहड़ी मांगते है । क्षेत्र  के वरिष्ठ साहित्यकार शेरजंग चौहान, रणजीत सिंह तोमर, जगदीश चंद सरोल्टा सहित अनेक लोगों   ने बताया कि मकर सक्रांति का त्यौहार राजगढ़ में मकर सक्रांति से दो दिन पूर्व आरंभ होता है । जिसमें पहले डिमलाईंटी, दूसरे दिन सकलायन और तीसरे दिन माघ की साजी पर पटांडे खीर बनाई जाती है । डिमलाईंटी की रात्रि को आटा को गुड़ में पकाया जाता है जिसे घी के साथ खाया जाता है । जिसे पहाड़ी भाषा में आटा घींडणा बोलते हैं । इस व्यंजन की ताहसीर गर्म होती है और गिरिपार क्षेत्र को यह प्रमुख पहाड़ी व्यंजन है । दूसरे सकलायन होती है जिसमें रात्रि को चावल के आटे की अस्कलियां बनाई जाती है जबकि कुछ लोग सिडडू  भी बनाते हैं । इस व्यंजन को घी के साथ खाते हैं ।
    इन्होने बताया कि माध की साजी को बड़ी साजी कहते हैं। इस दिन गांव में देवी देवताओं के प्राचीन मंदिरों में पारंपरिक पूजा की जाती है  और  लोग साजी को अपने कुलदेवता के मंदिर जाकर आर्शिवाद प्राप्त करते हैं । इनका कहना है कि हिंदू रीति के अनुसार वर्ष का अंतिम त्यौहार है और अंग्रेजी महिने का वर्ष का पहला त्यौहार है । माघी पर्व
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