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    सिरमौर

    शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, विश्वास, कौशल और नैतिक मूल्यों को विकसित करने में अहम – डॉ. शांडिल

    By Himachal VartaJuly 13, 2026
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     सोलन ( हिमाचल वार्ता न्यूज) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, विश्वास, कौशल और नैतिक मूल्यों को विकसित करती है। डॉ. शांडिल आज यहां राजकीय महाविद्यालय में लगभग 25.20 लाख रुपए की लागत से स्थापित डिजिटल पुस्तकालय का विधिवत शुभारंभ करने के उपरांत उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
    डॉ. शांडिल ने कहा कि शिक्षा जीवन स्तर को बेहतर बनाती है और व्यक्तियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन को बेहतर और अधिक शांतिपूर्ण बनाती है। यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को रूपांतरित करती है और उन्हें आत्मविश्वास से भर देती है।
    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र को प्राथमिक स्तर से ही मज़बूत बनाया जा रहा है। प्रथम चरण में प्रदेश के 140 सरकारी विद्यालयों में सी.बी.एस.ई. पाठ्यक्रम लागू करना, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल स्थापित करना और राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पहली कक्षा से ही पढ़ाई आरम्भ करने के निर्णय से छात्रों की नींव मज़बूत बन रही है।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के आधार को सुदृढ़ करने के साथ-साथ युवाओं को नशे जैसे सामाजिक अभिशाप से बचाने के लिए दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दलदल से बचाने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ‘चिट्टा मुक्त अभियान’ आरम्भ किया गया है। अभियान के तहत विभिन्न ज़िलों में वाकथॉन आयोजित कर युवाओं को नशे के विरुद्ध एकजुट किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि नशे से दूर रहें और इस बात को समझें कि नशा उनके और उनके परिवार के साथ-साथ समाज को भी खोखला कर रहा है।
    डॉ. शांडिल ने कहा कि प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुखाश्रय तथा इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजनाएं बेसहारा बच्चों के लिए रोशनी की किरण बनकर उभरी हैं। सोलन ज़िला में इस वर्ष इन योजनाओं के तहत एक करोड़ 60 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि  महत्वाकांक्षी  मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत 27 वर्ष तक के बेसहारा, परित्यक्त, अभित्यक्त एवं ट्रांसजेंडर बच्चों व व्यक्तियों जिनकी वार्षिक आय 05 लाख रुपए से कम है, को प्रति माह 04 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाती है।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की मज़बूती पर विशेष ध्यान दे रही है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय शिमला, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, टांडा, ज़िला कांगड़ा और अटल सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल इंस्टीटयूट चमियाना में रॉबोटिक शल्य चिकित्सा आरम्भ कर रोगियों को आधुनिक उपचार दिया जा रहा है। कैंसर जैसे गम्भीर रोग के निदान के लिए पेट स्कैन मशीनें स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यह प्रयास कर रही है कि ग्राम स्तर तक बेहतर विशेषज्ञ सुविधाएं उपलब्ध हों।
    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने महाविद्यालय के विद्यार्थियों से वार्तालाप किया तथा उपस्थित युवाओं से आग्रह किया कि सदैव अपने माता-पिता का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने वरिष्ठों के अनुभवों से सीख लें और अपने पारम्परिक मूल्यों और ज्ञान को सहेज कर रखें।
    डॉ. शांडिल ने तदोपरांत क्षेत्रीय अस्पताल सोलन का निरीक्षण भी किया तथा आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए।
    स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर जन समस्याएं भी सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को शीघ्रता से निपटाने के निर्देश दिए।
    इससे पूर्व महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मनीषा कोहली ने मुख्यातिथि का स्वागत किया तथा महाविद्यालय की समस्याओं से अवगत करवाया।
    इस अवसर पर हि.प्र. कांग्रेस पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष कर्नल संजय शांडिल, कांग्रेस खण्ड समिति सोलन के अध्यक्ष मनीष ठाकुर, ग्राम पंचायत मनसार के प्रधान जय प्रकाश, ग्राम पंचायत जौणाजी के प्रधान सचिन कश्यप, विश्व कर्मी समाज कल्याण बोर्ड के सदस्य मदन हिमाचली, वरिष्ठ कांग्रेसी जगमोहन मल्होत्रा, हिमाचल प्रदेश यूथ कांग्रेस सोलन के प्रभारी मनीष भगनाल, यूथ कांग्रेस सोलन के सचिव आशु, अधिवक्ता अनिल भगनाल, निदेशक स्वास्थ्य विभाग हिमाचल प्रदेश डॉ. गोपाल बेरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन डॉ. अजय पाठक, उपमण्डलाधिकारी सोलन नीरजा शर्मा, ज़िला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस डॉ. पदम देव, ज़िला कल्याण अधिकारी विवेक अरोड़ा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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