चंडीगढ़। पंजाब के विभिन्न जिलों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ और ‘बहुत बुरी’ बताई गई है। कोहरे के चलते राज्य के अधिकतर हिस्सों में दृष्यता कम हो गई है। राज्य में किसान पराली जलाने पर लगे प्रतिबंध की लगातार अनदेखी करते नजर आ रहे हैं।
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक पंजाब के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता में गिरावट आई है। कई जिलों में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ रही। बठिंडा में वायु गुणवत्ता सबसे रही, जिसका वायु गुणवत्ता सूचकांक 318 रहा। इसके बाद लुधियाना (302), जालंधर (278), अमृतसर (274) और पटियाला (263) का नंबर आता है। केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 280 रहा, जो ‘खराब’ माना जाता है।
गौरतलब है कि 0-50 एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘सामान्य’, 201-300 को ‘खराब’, 301-400 को ‘बेहद खराब’, 401-500 को ‘गंभीर’ और 500 से अधिक को ‘अति गंभीर या आपात’ माना जाता है। पंजाब में हाल ही में पराली जलाने के 22 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
चंडीगढ़ मौसम विभाग के निदेशक सुरिन्दर पाल ने शनिवार को कहा, ‘चंडीगढ़ और पंजाब में धुंध छाई हुई है।’ पाल ने कहा कि आने वाले दिनों में बारिश होने की संभावना है, जो लोगों को धुंध से छुटकारा दिलाएगी। उन्होंने कहा, ‘पश्चिमी विक्षोभ के चलते उत्तरी क्षेत्र में 6 और 7 नवंबर को मध्यम स्तर की बारिश से कुछ राहत मिलने का अनुमान है।’
किसानों ने मांगा मुआवजा
बठिंडा (निस) : बठिंडा शहर के आसपास के गांवों में धान की पराली को आग लगाये जाने से बठिंडा का प्रदूषण चार गुणा बढ़ गया है। पंजाब प्रदूषण बोर्ड बठिंडा के उपमंडल अभियंता हरदेव सिंह ने बताया कि यहां प्रदूषण का साधारण लेबल 100 है जबकि लेबल 400 के लगभग पहुंच चुका है। डाक्टरों के अनुसार दमे के मरीजों, दिल के मरीजों के लिये यह धुआं अत्यंत खतरनाक है। उधर, किरती किसान यूनियन के नेता अमरजीत सिंह हनी, भगवंत सिंह मांग कर चुके हैं कि किसानों को 6 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाये ताकि किसान पराली न जलायें जबकि बीकेयू एकता (उगराहां) के जिला बठिंडा के अध्यक्ष शिंगारा सिंह ने कहा कि उनकी यूनियन की मांग है कि किसानों को धान पर 200 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाये ताकि वे पराली को आग न लगायें व उनकी नुकसान की पूर्ति हो सके।
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Wednesday, June 3