शिमला। बेरोजगार युवाओं के आर्थिक पुनर्वास और शिक्षा ग्रहण न करने वाले बच्चों के लिए युवा सेवा एवं खेल, शिक्षा, ग्रामीण विकास विभाग को ऐसे युवाओं की पहचान कर उन्हें रोजगार उन्मुक्त, आजीविका क्षमता और आर्थिक निर्भरता में मदद के लिए आगे आना चाहिए।
यह बात मुख्य सचिव डाॅ. श्रीकांत बाल्दी ने आज यहां मुख्यमंत्री द्वारा 15 नवम्बर से 15 दिसम्बर, 2019 तक नशा निवारण और शराबबंदी के लिए शिमला से आरम्भ किए जाने वाले विशेष अभियान से सम्बन्धित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास निगम हिमाचल प्रदेश कौशल विकास परियोजना की प्रारम्भिक क्रियान्वयन समिति है। विभाग द्वारा युवाओं को चिन्हित कर निगम के साथ जोड़ने का कार्य करना चाहिए। स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को रोजगार से जोड़ने और बेरोजगार युवाओं को चिन्हित कर उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जाना चाहिए ताकि वह नशा माफिया के चंगुल में न फंसें।
उन्होंने कहा कि एक माह लम्बे इस अभियान का उद्देश्य समाज में जागरूकता लाना है। मुख्यतः अभिभावकों तथा बच्चों में नशे के दुष्प्रभावों और इससे बचने के उपायों का संदेश देना है। उन्होंने प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों के साथ सम्पर्क स्थापित करने और ऐसे युवाओं को आवश्यकता अनुसार कौशल विकास के अवसर प्रदान करने चाहिए।
उन्होंने प्रदेश में इस अभियान पर सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के निदेशालय तथा क्षेत्रीय अधिकारियों को प्रतिदिन प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वाबलम्बन योजना को और प्रोत्साहित करने और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करना समय की मांग है। इस योजना के अतंर्गत युवाओं को अब तक 25 से 30 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने सभी विभागों और गैर-सरकारी संस्थानों से आहवान किया कि वह नशे की बुराई से लड़ने के लिए आगे आएं।
विभिन्न विभागों के अध्यक्षों और नोडल अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।
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Tuesday, June 16