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    Home»हिमाचल प्रदेश»गौ काष्ठ से वातावरण होगा शुद्व व निराश्रित पषुओ की समस्या का होगा समाधान-डॉ0परूथी
    हिमाचल प्रदेश

    गौ काष्ठ से वातावरण होगा शुद्व व निराश्रित पषुओ की समस्या का होगा समाधान-डॉ0परूथी

    By Himachal VartaJanuary 16, 2020
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    उपायुक्त सिरमौर ने माता बालासुंदरी गौषाला में किया   गौ काष्ठ मषीन का शुभारंभ
    नाहन। जिला सिरमौर को स्वच्छ बनाने के दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उपायुक्त सिरमौर डॉ0आर0के0परूथी ने आज माता बालासुंदरी गौशाला एवं जैविक प्रशिक्षण केन्द्र में गाय के गोबर से काष्ठ बनाने के लिए गौ काष्ठ मशीन स्थापित की है।
    उन्होंने बताया कि मशीन के प्रयोग से बनने वाली काष्ठ ईंधन का काम करेगी जोकि ऊर्जा का एक सस्ता साधन है। इसके प्रयोग करने से कार्बनडाइआक्साईड के स्थान पर ऑक्सीजन पैदा होगी जोकि अपशिष्ट पदार्थ को जैव उत्पाद में बदलने में सहायक होगी और वनों को भी संरक्षण मिलेगा।
    उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिसका उद्देश्य जिला सिरमौर में निराश्रित पशुओं की संख्या को कम करना है और जिला में बने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि पशुओं के गोबर से काष्ठ बनाकर कमाईं के साधन के रूप में ईस्तेमाल कर सकते है। उन्होंने कहा कि यह प्रयोग जिला सिरमौर के ओद्यौगिक क्षेत्रों में वातावरण को शुद्व करने के लिए कारगर साबित होगा।
    उन्होंने बताया कि गोबर की एक काष्ठ की कीमत पाँच रूपये निर्धारित की गई है जोकि एक सप्ताह के बाद माता बालासुंदरी गौशाला में बिक्री के लिए उपलब्ध होगी इसका इस्तेमाल सभी महत्वपूर्ण उद्योगों, मोक्षधामर्, इंट के भट्ठे में ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जाएगी। उन्होंने बताया कि गाय के गोबर से दीए, गमले व हवन सामग्री बनाने की मशीने भी जल्द स्थापित की जाएगी।
    सहायक निदेशक पशुपालन नीरू शबनम ने बताया कि चार दिन पुराने दस किलो गोबर इस्तेमाल से चार काष्ठ बन सकती है जिसमें एक काष्ठ आकार लगभग 2.5 फुट लम्बा व र्2.5 इंच चौडा होगा। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि वह दुध न देने वाले पशुओं को निराश्रित न छोड़े क्योंकि इनके गोबर और गौ मूत्र से कई प्रकार के उत्पादों का निर्माण कर आजिविका कमाई जा सकती है। उन्होंने स्वंय सहायता समूह व अन्य संस्थाओं से आग्रह किया है कि यदि वे गौ काष्ठ बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते है तो वह माता बालासुंदरी गौशाला एवं जैविक प्रशिक्षण केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए सम्पर्क कर सकते है।

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