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    Home»हिमाचल प्रदेश»सुरेश कश्यप के सामने कई हैं चुनौतियों
    हिमाचल प्रदेश

    सुरेश कश्यप के सामने कई हैं चुनौतियों

    By Himachal VartaJuly 28, 2020
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    कार्यकारिणी में नहीं होगा कोई बदलाव , अनुशासनहीनता होगी बर्दाश्त से बाहर- सुरेश कश्यप

    कार्यसमिति की बैठक वर्चुअल होगी या फिर मैनुअल उपस्थिति में इस पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं…

    नाहन।  शिमला पार्लियामेंट्री क्षेत्र के सांसद पच्छाद के पूर्व विधायक मौजूदा समय प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष सुरेश कश्यप 29 जुलाई को पदभार ग्रहण कर लेंगे। कार्यकारिणी के विस्तार या बदलाव को लेकर उन्होंने बिल्कुल स्पष्ट रूप से कह दिया है कि जो कार्यकारिणी बनाई गई है बहुत अच्छी व बेहतर तालमेल के साथ बनाई गई है। जिसमें बदलाव का कोई मतलब ही नहीं है। संगठन को और मजबूत करने के लिए कार्यकारिणी में और नियुक्तियां हो सकती है मगर यह निर्णय पदभार के बाद ही संभवत लिया जाएगा।

    बरहाल आपको यह भी बता दें कि सुरेश कश्यप भले ही साधारण और ईमानदार छवि के व्यक्ति हो मगर अनुशासन उनकी हमेशा प्राथमिकता रहती है। इसीलिए उन्होंने यह स्पष्ट रूप से जाहिर भी कर दिया है कि संगठन को और अधिक मजबूत किया जाएगा मगर अनुशासनहीनता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि कार्यभार ग्रहण करने के बाद पदाधिकारियों के साथ जल्द बैठक के भी संकेत हैं संभवत उसके बाद नगर निकायों पंचायती राज तथा मिशन 2022 को सफल बनाने के लिए रणनीतियां तैयार हो सकती है।

    इसमें भी कोई शक नहीं है कि सुरेश कश्यप के तरकस में कई ऐसे अचूक तीर है जिनका प्रयोग वे बिल्कुल सही वक्त पर ही करेंगे। हाईकमान यानी जेपी नड्डा ने शिमला संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के बचे खुचे किलों को भी 2022 से पहले ध्वस्त करने के लिए संभवत ऊपरी हिमाचल को बढ़ा अधिमान दिया है। सिरमौर में शिलाई और श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की जीत सुनिश्चित करना सुरेश कश्यप के लिए चुनौती भी रहेगी। हालांकि दोनों विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशियों में यदि राजनीतिक परिदृश्य से देखा जाए तो काफी सुधार भी हुआ है। संभवत इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों के यही प्रत्याशी रहेंगे मगर इनके साथ किसी भी तरह की अंदरूनी राजनीति बर्दाश्त से बाहर भी हो सकती है।

    जिस प्रकार किन्नौर बिलासपुर सोलन के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिनकी जिम्मेदारियां उनके पास बहुत सारे नंबर नए पदभारओं के साथ सुनिश्चित भी हो सकती हैं। अब यदि केंद्रीय सूत्रों पर हाईकमान की बात की जाए तो बहुत से ऐसे मुद्दे हैं जिसमें नाहन आर्मी सिविलयन विवाद भी है संभवत सुरेश कश्यप के माध्यम से जल्द हल हो सकता है। सिरमौर और बद्दी क्षेत्र के लिए रेल । किन्नौर बस शिमला के सेब को शिमला से बाहर बाईपास सेफ रूट चौपाल से राजगढ़ होते हुए दिलाना 2022 की रणनीति के लिए जरूरी होगा। मुख्यमंत्री की इन्वेस्टर मीट को उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल और सुविधाजनक बनाते हुए मेक इन हिमाचल यानी स्थानीय उत्पादों को एमएसएमई के साथ भी जोड़ना मिशन को सक्सेस करेगा।

    बरहाल कार्यभार ग्रहण करने के बाद भले ही सुरेश कश्यप ने कार्यकारिणी में बदलाव के संकेत न दिए हो मगर कूटनीतिक पहलुओं को देखते हुए कुछ बड़े बदलाव भी किए जाने जरूरी होंगे। इसकी बड़ी वजह तीसरे मोर्चे कि प्रदेश में जो चुपचाप हलचल शुरू हो रही है उसकी आवाज बीजेपी के संगठन के बीच में से ही आ रही है। ऐसे में कई चुनौतियां भी सामने आएंगी संभवत यह सब अब मुख्यमंत्री के द्वारा अपने स्तर पर कुछ कड़े निर्णय लेते हुए ही संभव हो पाएगा।

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