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    Home»चण्डीगढ़»मुख्यमंत्री ने कृषि बिलों पर भाजपा द्वारा अकालियों की कड़ी आलोचना के बाद भी सत्ता के साथ चिपके रहने की अकाली दल की लालसा का मज़ाक उड़ाया
    चण्डीगढ़

    मुख्यमंत्री ने कृषि बिलों पर भाजपा द्वारा अकालियों की कड़ी आलोचना के बाद भी सत्ता के साथ चिपके रहने की अकाली दल की लालसा का मज़ाक उड़ाया

    By Himachal VartaSeptember 27, 2020
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    सुखबीर द्वारा हरसिमरत के इस्तीफे को ‘परमाणु बम’ कहने पर व्यंग्य करते हुए कहा, यह तो फुस्स पटाख़ा भी नहीं निकला

    अकाली दल प्रधान द्वारा किसानों के प्रदर्शन को नाकाम करने की शर्मनाक कोशिश के द्वारा सेहरा अपने सिर बाँधने की की सख़्त निन्दा

    चंडीगढ़ (हिमाचलवार्ता)। विवादित कृषि बिलों को लेकर एक-दूसरे के खि़लाफ़ सौदेबाज़ी कर रही पुरानी सहयोगी पार्टियाँ अकाली दल और भाजपा द्वारा सार्वजनिक तौर पर आपस में दोष लगाने की खेली जा रही राजनीति का मज़ाक उड़ाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शनिवार को कहा कि अकालियों द्वारा एन.डी.ए. गठजोड़ न छोडऩा उनकी तरफ से सत्ता हासिल करने की ख़्वाहिश और लालच को सिद्ध करता है।

    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अकाली दल पंजाब और किसानों की कीमत पर सत्ता सुख का भोग करने वाले आखिऱी पड़ावों पर हैं, इसके बावजूद कि उनकी हिस्सेदार पार्टी भाजपा द्वारा सार्वजनिक तौर पर उनको अपमानित किया जाता है। उन्होंने अकाली दल के दोहरे मापदण्डों और किसानी भाईचारे के प्रति चिंता की पूर्ण कमी का पर्दाफाश किया। वह भाजपा के उस बयान का हवाला दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा ने कृषि बिलों पर किसानों को मनाने का काम अकालियों पर छोड़ दिया था।

    मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अकाली अभी भी किसान विरोधी और लोग विरोधी भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का हिस्सा क्यों हैं, जिन्होंने कॉर्पोरेट घरानों के साथ मिलकर किसानों को रोज़ी-रोटी से वंचित करने और पंजाब को बर्बाद करने की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि अकाली दल अभी भी राजसी तौर पर बने रहने के लिए अपना हर प्रयास एवं साधन बरतने की कोशिश कर रहा है।

    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकाली दल के प्रधान द्वारा शर्मनाक तरीके से दोहरी बोली बोलने की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पंजाब भर में किसानों में फैले व्यापक गुस्से के बाद अपनी राजसी साख बचाने के लिए हरसिमरत कौर द्वारा केंद्रीय मंत्रालय से इस्तीफ़ा देने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि सुखबीर बादल केंद्र सरकार से अकाली दल को बाहर कर लेंगे, परन्तु ऐसा नहीं हुआ है।

    ग़ैर-संवैधानिक और ग़ैर-प्रजातांत्रिक कृषि बिलों के द्वारा कॉर्पोरेट घरानों के पास हित बेचने वाली केंद्र सरकार की लगातार हिमायत करने के लिए अकालियों पर बरसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली दल ने पूरी तरह से अपने राजसी भरोसे योग्यता को गंवा दिया है या नए कानूनों पर अड़चने खड़ी की हुई हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल के ख़ात्मे के लिए बादल ही जि़म्मेदार हैं।

    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि किसानों की अकालियों के प्रति नाराजग़ी से लेकर भाजपा से निपटने तक लग रहा है कि अकाली दल पंजाब के राजसी नक्शे से पूरी तरह लुप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग ख़ासकर किसान बादलों को उनके धोखे और बेईमानी के लिए कभी क्षमा नहीं करेंगे।

    सुखबीर द्वारा हरसिमरत केंद्रीय मंत्रालय से इस्तीफे को ‘परमाणु बम’ कहने जिसने प्रधानमंत्री को हिला दिया, पर व्यंग्य करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह तो यह एक फुस्स पटाख़ा भी नहीं था, जिसका कोई प्रभाव नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा अकालियों की रत्ती भर भी परवाह नहीं करत,े जैसे कि उसके गठजोड़ के पूर्व हिस्सेदार की आलोचना से स्पष्ट हो रहा है और हरसिमरत का इस्तीफ़ा भी तुरंत ही स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि लगता है कि भाजपा पंजाब विधानसभा मतदान अकेले लडऩा चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर अकाली दल ने सत्ताधारी गठजोड़ अपने आप नहीं छोड़ा तो लगता है कि एन.डी.ए. अकाली दल को अपने आप बाहर निकाल देगी।

    मुख्यमंत्री ने अकाली दल के प्रधान द्वारा किसानों के आंदोलन और कल के भारत/पंजाब बंद के बुलावे की सफलता का सेहरा अपने सिर बाँधने की उनकी कोशिशों की कड़े शब्दों में निन्दा की, जिसमें सुखबीर ने दावा किया कि अकाली दल द्वारा राज्य स्तरीय रोष प्रदर्शन किए गए। उन्होंने कहा कि वास्तव में अकाली दल ने किसानों द्वारा बंद के बुलावे के बाद राज्य स्तर पर चक्का जाम करने के ऐलान के साथ किसानों के आंदोलन को नाकाम करने की शर्मनाक कोशिश की। यह बात किसान जत्थेबंदियों के गले नहीं उतरी, जिन्होंने अकाली दल की कार्यवाही की सख़्त निंदा की।

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