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    Home»हिमाचल प्रदेश»आठ बार नेशनल खेलने वाले कोच बेलचा चलाने को मजबूर!
    हिमाचल प्रदेश

    आठ बार नेशनल खेलने वाले कोच बेलचा चलाने को मजबूर!

    By Himachal VartaSeptember 29, 2020
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    विडंबना : आठ बार नेशनल खेलने वाले कोच बेलचा चलाने को विवश

    विडंबना : आठ बार नेशनल खेलने वाले कोच बेलचा चलाने को विवश

    हमीरपुर  (हिमाचलवार्ता) :  हिमाचल के लिए 200 मीटर में सबसे तेज दौड़ने वाला खिलाड़ी बेलचा चलाने को मजबूर है। आठ बार नेशनल खेल चुके एथलीट और एनआईएस (पटियाला) कोच अनूप सिंह राणा कोरोना काल में दिहाड़ी लगा रहे हैं। जिस कॉलेज से अनूप ने बीए की, उसी कॉलेज के बाहर वह दिहाड़ी लगा रहे हैं।

    सरकार उन्हें अभी तक नौकरी नहीं दे पाई है।  प्राप्त जानकारी के मुताबिक अनूप ने वर्ष 1999, 2000 में अखिल भारतीय अंतर विवि एथलेटिक्स प्रतियोगिता में दो बार प्रदेश विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। 2001 से 2007 तक एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।

    वर्ष 2004 में मंडी के पड्डल मैदान में हुई राज्य स्तरीय सीनियर एथलेटिक्स में अनूप राणा ने 100 मीटर दौड़ 10.9 सेकेंड और 200 मीटर दौड़ 22.1 सेकेंड में पूरी कर कीर्तिमान स्थापित किए। 13 वर्षों बाद उन्हीं के शिष्य संदीप कुमार ने वर्ष 2017 में 100 मीटर दौड़ में उनका रिकॉर्ड तोड़ा।

    200 मीटर का कीर्तिमान अभी तक अनूप सिंह के नाम बरकरार है। इसके अलावा 2004 से 2006 तक लगातार तीन बार प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ तेज धावक का कीर्तिमान भी अनूप राणा के नाम रहा। 1999 से 2007 तक करीब 70 से भी ज्यादा पदक जीत चुके हैं।

    अनूप राणा ने कहा कि उन्होंने 2006 में खेल विभाग में खेल आरक्षण कोटे में पंजीकरण करवाया था। 14 साल बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। कहा कि ऐसे प्रशिक्षकों को नियुक्तियां दी गईं, जिन्होंने जिला स्तरीय खेलों में प्रतिनिधित्व करने के उपरांत मात्र 42 दिन का प्रशिक्षण लिया था। उन्हें नजरअंदाज किया गया।

    अनूप राणा अब तक डीएवी हमीरपुर, आईआईटी मंडी और पंजाब के निजी विश्वविद्यालय में बतौर खेल प्रशिक्षक सैकड़ों खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। ढाई सौ के करीब खिलाड़ी देश के विभिन्न राज्यों से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। सुबह-शाम समय निकाल कर आज भी अनूप सिंह राणा देश के विभिन्न राज्यों में स्थित खिलाड़ियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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