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    Home»हिमाचल प्रदेश»धान की फसल नहीं खरीदे जाने पर किसान परेशान!
    हिमाचल प्रदेश

    धान की फसल नहीं खरीदे जाने पर किसान परेशान!

    By Himachal VartaOctober 8, 2020
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    असर दिखाने लगा कृषि बिल : सरकार नही खरीद रही धान, कहां जाये किसान

    नाहन (हिमाचलवार्ता) । ब्लूप्रिंट प्रिंट विजन कमेटी के प्रदेश संयोजक अनिन्द्र सिंह नौटी और पांवटा साहिब के सैंकड़ों किसानों का कहना है कि प्रदेश के दून मे लाखों क्विंटल धान की पकी फसल खेतों मे पड़ी है लेकिन प्रदेश सरकार खरीद की कोई व्यवस्था नही कर रही। उन्होंने कहा कि प्रदेश मे धान की खरीद नही किए जाने के कारण किसानों की फसल खराब होने के कगार पर पहुँच गई है ऐसे मे किसान कहाँ जायें। पांवटा साहिब मे जारी प्रेस बयान में ब्लूप्रिंट विजन कमेटी के संयोजक अनिन्द्र सिंह नौटी एवं स्थानीय किसान जगदीश चौधरी, चैन सिंह जिला परिषद सदस्य, मेवा सिंह, सिमरत सिंह प्रधान, हरप्रीत सिंह खालसा, जोगिंदर चौधरी, मान सिंह चौधरी, मोहन सिंह सैनी, साजिद हाशमी, शमशेर अली काशमी, सतविंदर सिंह बिट्टू, बहादुर सिंह, मोहम्मद अयूब, राजेंद्र सिंह राणा, रमणीक सिंह सैनी, परमजीत सिंह बंगा, अनुज अग्रवाल, गुरजीत सिंह फौजी व विनय गोयल आदि ने कहा कि पिछले दिनों ऊर्जा मंत्री चौधरी सुखराम ने अपने एक बयान में दावा किया था कि पांवटा साहिब में धान की फसल की शत-प्रतिशत खरीद होगी और उन्होंने कुछ स्थानीय शैलर का दौरा करके तस्वीरों के साथ दावा किया था कि शेलर में धान की कुटाई जल्दी ही शुरू होगी और उसका टारगेट भी बताया था।

    जबकि सच्चाई इसके बिलकुल विपरीत है और एफसीआई ने अभी तक धान की खरीद का सेंटर ही नहीं खोला है। और ना ही अभी तक स्थानीय शेलर या कृषि उपज मंडी समिति के साथ कोई अनुबंध हस्ताक्षर हुआ है।

    दूसरी ओर धान की अगेती किस्मों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। किसान मार्केट की व्यवस्था ना होने पर औने पौने दाम पर दलालों को बेचने पर मजबूर हो रहे हैं। एक तरफ किसानों की छह महीने की मेहनत खेतों में पड़ी है वहां दूसरी और ऊर्जा मंत्री मनाली की वादियां निहार रहे हैं।

    मंत्री को पांवटा साहिब की जनता ने चुना है ना कि मनाली की। तो ऐसे में उनको पहले यहां के किसानों की सुध लेनी चाहिए थी। इसके बाद अपने दौरे निश्चित करने चाहिए थे। उन्होंने भारतीय खाद्य निगम और केंद्र सरकार व राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि इस बार कम से कम तीस हजार क्विंटल धान की खरीद के लक्ष्य के साथ सारी तैयारियां मुकम्मल की जाए, विगत वर्ष मात्र 8000 क्विंटल धान ही खरीदा जा सका था और बहुत किसानों को प्रदेश से बाहर धान बेचने पर मजबूर होना पड़ा था।

    इस बार वैसे भी हरियाणा में हिमाचल के किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है। ब्लूप्रिंट विजन कमेटी ने लॉक डाउन की चरम अवस्था में भी गेहूं की खरीद का मामला लगातार सरकार के समक्ष उठाया था और कृषि उपज मंडी समिति तथा किसानों में बेहतर तालमेल बनाने में अपनी भूमिका अदा की जिसके फलस्वरूप इस बार गेहूं की रिकार्ड खरीद स्थानीय मंडी में हुई थी और इससे मार्केट कमेटी को भी छह लाख की आय अर्जित हुई।

    इसी तर्ज पर अगर तीस हजार क्विंटल धान यहां पर खरीदा जाता है तो कृषि उपज मंडी समिति को एक बार फिर से जहां लाखों रुपए की आमदनी होगी वही किसानों को भी बहुत राहत मिलेगी। नौटी ने कहा कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कानूनों की कमियां अभी से सामने आनी शुरू हो चुकी है।

    क्योंकि जहां केंद्र सरकार ने दावा किया कि किसान अपनी फसल को देश में कहीं भी लेकर जा सकता है और उसको न्यूनतम समर्थन मूल्य तो कम से कम मिलेगा ऐसे में हरियाणा ही केंद्र सरकार के दावों की हवा निकाल रहा है और दूसरे राज्यों के किसानों को हरियाणा में घुसने भी नहीं दे रहा।

    हिमाचल प्रदेश सरकार तथा स्थानीय मंत्री को पहले हिमाचल के किसानों की चिंता होनी चाहिए और धान की खरीद के बाद बाकी काम किए जा सकते हैं। अगर जल्दी ही धान का खरीद सेंटर स्थापित नहीं होता तो किसान बहुत बड़ा जन आंदोलन भी शुरू कर सकते हैं और बहराल स्थित हरियाणा की सीमा पर हरियाणा से आने वाले हरियाणा नंबर के वाहनों और बसों को भी रोका जाएगा।

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