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    Home»हिमाचल प्रदेश»शिलाई की बाली कोटी पंचायत के साथ हो रहा है सौतेला व्यवहार!
    हिमाचल प्रदेश

    शिलाई की बाली कोटी पंचायत के साथ हो रहा है सौतेला व्यवहार!

    By Himachal VartaOctober 10, 2020
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    4500 जनसँख्या और 2800 मतदाता फिर भी अलग नहीं हुई पंचायत और राजनेताओं का शिकार हो रही है!

    4500 जनसँख्या और 2800 मतदाता फिर भी अलग नहीं हुई पंचायत जानिए वजह......... 

    नाहन (हिमाचलवार्ता)। नागरिक उप मंडल शिलाई की पंचायत बाली कोटी विकासखंड की सबसे बड़ी पंचायत होने के बावजूद सभी मापदंड पूरा होने के पर भी अलग नहीं हो पाई। पंचायत के लोग इसका मुख्य कारण स्थानीय नेता का अड़गा बता रहे है, पंचायत  लोगों का कहना है कि बालीकोटि पंचायत विकासखंड शिलाई की सबसे बड़ी पंचायत है। पंचायत की वर्तमान जनसंख्या 4500 के करीब है जबकि 2800 के करीब मतदाता है, राजनीतिक उपेक्षा का दंश झेल रही यह पंचायत राजनेताओं की कठपुतली बन कर रह गई है।
    पंचायत वासियों का कहना है कि यहां आवाम के आवाज को दबा कर उनके अधिकारों का हनन हो रहा है, बड़ी पंचायत होने के बावजूद भी पूर्व तथा वर्तमान सरकार ने इसे अलग नहीं किया। यहां सरकार के मापदंडों के अनुसार इसकी 3 पंचायतें बननी चाहिए , लेकिन नेता की जिद ने साढ़े चार हजार लोगों को उनके हक से बनचित कर दिया, यहां के ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
    पंचायत के लोगों ने राजनेताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए बताया कि पंचायत के लोग आने वाले विधानसभा चुनाव में नेताओं को मोटा सबक सिखाएंगे।  ग्राम पंचायत वाली कोटी के तीन राजस्व ग्राम है बाली कोटी, चामरा मोहराड और बोबरी है, पंचायत राज विभाग हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष यह कहकर प्रदेश में 405 नई ग्राम पंचायतों का गठन किया की छोटी-छोटी पंचायत में दूरदराज गांव तक विकास पहुंचना चाहिए।
    पंचायतों को अलग करने के लिए प्रदेश सरकार और पंचायत राज विभाग ने मापदंड तय किए थे कि जिस पंचायत की जनसंख्या 2011 में दो हजार से ज्यादा होनी चाहिए , पंचायत मुख्यालय से अंतिम गांव की  दूरी 5 किलोमीटर होनी चाहिए। गौर हो कि बताते चलें पंचायत मुख्यालय वाली कोटी से राजस्व ग्राम बोबरी की दूरी 10 किलोमीटर है जबकि पंचायत मुख्यालय से चामरा मोहराड की दूरी साडे 10 किलोमीटर है भारतीय जनगणना 2011 के मुताबिक पंचायत की जनसंख्या 3125 है भौगोलिक दृष्टि से अगर इस पंचायत को देखा जाए तो राजस्व ग्राम बोबरी से चमरा मोहराड के अंतिम गांव पोंजाह की दूरी करीब 22 किलोमीटर है , लेकिन वर्तमान सरकार ने बाली कोटी पंचायत से चामरा मोहरड पंचायत व बोबरी को अलग नहीं किया है।
    सूत्र बताते हैं की एक राजनेता ने पंचायत अलग होने में अड़ंगा डाल कर मुख्यमंत्री तथा पंचायती राजमंत्री को कहकर पंचायत को अलग होने से रोक दिया, जबकि अलग होने वाली पंचायत चामरा मोहराड़ सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड पूरे कर रही है, आरोप है कि 405 पंचायतों में से 80 फ़ीसदी पंचायत हैं ऐसी भी सरकार ने अलग भी है जिनके कुल मतदाता   600 से 800 है।
    वर्तमान में इस पंचायत की जनसंख्या 4500 हजार के लगभग है जबकि तीन हजार के करीब मतदाता है। यदि सरकार के मापदंडों की बात की जाए तो बाली कोटि पंचायत से 2 पंचायतें अलग हो सकती है। इस पंचायत की भौगोलिक दृष्टि तथा जनसंख्या को देखकर इसकी 3 पंचायत बननी चाहिए, ज्ञात हो कि वर्ष 2016 में तत्कालीन सांसद जगत प्रकाश नड्डा ने इस पंचायत को आदर्श सांसद पंचायत योजना के तहत गोद लेकर पंचायत में घंईी17 करोड़ का विकास करने की घोषणा थी, आदर्श सांसद ग्राम योजना के तहत कितना विकास हुआ यह किसी से छुपा नहीं है।
     शिलाई विधानसभा क्षेत्र के विधायक हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि बालीकोटी से एक नहीं बल्कि 2 पंचायतें अलग होनी चाहिए। उन्होंने इस बारे में स्वयं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी बात की लेकिन उन्होंने भी इस बात पर गौर नहीं किया, यह पंचायत  विकासखंड शिलाई की सबसे बड़ी पंचायत है। भाजपा सरकार और उनके हुक्मरान बाली कोटी पंचायत के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार कर उनके हक को दबा रहे है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा पंचायत के लोगों से विचार-विमर्श कर माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर लोगों को उनका हक दिलाएंगे। 
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