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    Home»देश»प्रधामंत्री ने गुजरात के गांधीनगर में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया
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    प्रधामंत्री ने गुजरात के गांधीनगर में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया

    By Himachal VartaNovember 21, 2020
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    विश्वविद्यालय में विभिन्न सुविधाओं का अनावरण किया

    हमारा उद्देश्य भारत में कार्बन उत्सर्जन को 30-35 प्रतिशत कम करना और प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 4 गुना बढ़ाना है: प्रधानमंत्री

    21वीं सदी के युवाओं से स्पष्ट योजनाओं के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया

     

    The Prime Minister, Shri Narendra Modi and the Prime Minister of Grand Duchy of Luxembourg, Mr. Xavier Bettel holds virtual India-Luxembourg Summit, in New Delhi on November 19, 2020.

    नयी दिल्ली (हिमाचलवार्ता)। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उन्होंने 45 मेगावाट के उत्पादन संयंत्र मोनोक्रिस्टलाइन सोलर फोटोवोल्टिक पैनल और जल प्रौद्योगिकी उत्कृष्ठता केन्द्र की आधारशिला रखी। उन्होंने विश्वविद्यालय में ‘अभिनव और उद्भवन केन्द्र-प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेशन’, ‘ट्रांसलेशनल अनुसंधान केन्द्र’  और ‘खेल परिसर’ का भी उद्घाटन किया।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे समय में स्नातक होना आसान बात नहीं है जब विश्व इतने बड़े संकट का सामना कर रहा है, लेकिन उनकी क्षमताएं इन चुनौतियों से बहुत बड़ी हैं। उन्होंने कहा कि छात्र इस उद्योग में ऐसे समय में प्रवेश कर रहे हैं जब महामारी के कारण दुनिया भर में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव हो रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दृष्टि से, आज भारत के ऊर्जा क्षेत्र में वृद्धि, उद्यमिता और रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि आज देश अपने कार्बन उत्सर्जन को 30-35 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और इस दशक में हमारी ऊर्जा जरूरतों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए प्रयास किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि अगले पांच वर्षों में तेल शोधन क्षमता को दोगुना करने का कार्य जारी है, ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और छात्रों और पेशेवरों के लिए एक कोष बनाया गया है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों से जीवन में एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने बल देते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि सफल लोगों के पास समस्याएं नहीं हैं, लेकिन जो चुनौतियों को स्वीकार करता है, उनका सामना करता है, उन्हें हराता है, समस्याओं को हल करता है, केवल वही सफल होता है। उन्होंने कहा कि जो लोगों चुनौतियों का सामना करते हैं, बाद में वही जीवन में सफल होते हैं। उन्होंने कहा कि 1922-47 के दौर के युवाओं ने आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। उन्होंने छात्रों से देश के लिए जीने और आत्मनिर्भर भारत के आंदोलन से जुड़ने के साथ-साथ जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आग्रह किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सफलता का बीज ज़िम्मेदारी की भावना में निहित है और ज़िम्मेदारी की भावना को जीवन के उद्देश्य में बदल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वही लोग जीवन में सफल होते हैं, जो कुछ ऐसा करते हैं जिससे उन्हें जीवन में जिम्मेदारी का अहसास होता है और असफल होने वाले लोग वह होते हैं जो हमेशा एक बोझ तले जीवन जीते हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी की भावना भी एक व्यक्ति के जीवन में अवसर की भावना को जन्म देती है। उन्होंने कहा कि भारत कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है और युवा स्नातकों को प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री ने प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा पर भी जोर दिया।

    प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी के युवाओं की वर्तमान पीढ़ी से स्पष्ट योजना के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि क्लीन स्लेट और क्लीन हार्ट का मतलब स्पष्ट इरादों से है। उन्होंने कहा कि दुनिया की आशाएं और अपेक्षाएं 21वीं सदी में भारत से अधिक हैं और भारत की आशाएं और अपेक्षाएं छात्रों और पेशेवरों के साथ जुड़ी हुई हैं।

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